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भीमसेन के प्रिय राग पर झूमे संगीत रसिक
Varanasi
Updated Wed, 26 Feb 2014 05:30 AM IST
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वाराणसी। भारत रत्न पं. भीमसेन जोशी के शिष्य पं. उपेंद्र भट्ट ने मंगलवार की शाम गुरु के प्रिय राग पर अलापचारी से संगीत प्रेमियों को मुग्ध कर दिया। गायन-वादन की इस संगीत संध्या में वायलिन की प्रस्तुति भी सराही गई। कमच्छा स्थित थियोसोफिकल सोसाइटी के सभागार में यह कार्यक्रम कला प्रकाश की ओर से आयोजित किया गया था।
संगीत प्रेमियों से भरे सभागार में पुणे से आए पं. उपेंद्र भट्ट ने अपने गुरु पं. भीमसेन के प्रिय राग पूरिया धनाश्री से शुरुआत की। विलंबित एक ताल में निबद्ध बंदिश के बोल थे- सुमिरो तेरो नाम...। उन्होंने कई बंदिशों के बाद भजन की प्रस्तुति की। तबले पर सौम्य कांति मुखर्जी और हारमोनियम पर अशोक झा ने संगत की। इनके पहले रोहन नायडू ने वायलिन पर राग भीम की अवतारणा की। अलाप, जोड़, झाला के विलंबित और द्रुत गत बजाकर उन्होंने वाहवाली लूटी। तबले पर हरिओम हरि ने संगत की। थियोसोफिकल सोसाइटी की जनरल सेक्रेटरी एस सुंदरम ने कलाकारों का स्वागत किया। संचालन बृजराज अग्रवाल और धन्यवाद ज्ञापन कला प्रकाश के अध्यक्ष अशोक कपूर ने किया।
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संगीत प्रेमियों से भरे सभागार में पुणे से आए पं. उपेंद्र भट्ट ने अपने गुरु पं. भीमसेन के प्रिय राग पूरिया धनाश्री से शुरुआत की। विलंबित एक ताल में निबद्ध बंदिश के बोल थे- सुमिरो तेरो नाम...। उन्होंने कई बंदिशों के बाद भजन की प्रस्तुति की। तबले पर सौम्य कांति मुखर्जी और हारमोनियम पर अशोक झा ने संगत की। इनके पहले रोहन नायडू ने वायलिन पर राग भीम की अवतारणा की। अलाप, जोड़, झाला के विलंबित और द्रुत गत बजाकर उन्होंने वाहवाली लूटी। तबले पर हरिओम हरि ने संगत की। थियोसोफिकल सोसाइटी की जनरल सेक्रेटरी एस सुंदरम ने कलाकारों का स्वागत किया। संचालन बृजराज अग्रवाल और धन्यवाद ज्ञापन कला प्रकाश के अध्यक्ष अशोक कपूर ने किया।
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