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एक नवजात को पाने के लिए थाने पर डटे एनजीओ
Varanasi
Updated Wed, 27 Nov 2013 05:43 AM IST
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दानगंज। वाराणसी-चोलापुर मार्ग पर नाद नदी के पुल के पास सड़क के किनारे मिले नवजात का पालन पोषण कर रही महिला से नवजात को हासिल करने के लिए दो-तीन एनजीओ के लोग मंगलवार को थाने पर जुटे रहे लेकिन उन्हेें सफलता नहीं मिली। घंटों मशक्कत करने के बाद उन्हें बैरंग वापस लौटना पड़ा। महिला के पति ने अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में अपील कर नवजात के पालन, पोषण और उसे अपना वारिस बनाने की अनुमति मांगी है। उधर, पुलिस का कहना है कि नियमानुसार लावारिस शिशु को चाइल्ड लाइन के माध्यम से बाल कल्याण समिति में प्रस्तुत किया जाना है।
चोलापुर (गोला) गांव के कुछ लोगों ने 20 नवंबर की भोर में नाद नदी के पास सड़क के किनारे पड़े नवजात शिशु को देखा था। जानकारी होने पर पहुंची इसी गांव की राजकुमारी ने नवजात को पालन पोषण के लिए ले लिया। राजकुमारी का पति बाबूराम सरोज चंदौली के नौबतपुर में वाणिज्यकर विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है। उसने डीएम और अन्य उच्चाधिकारियों को सूचना दी कि वह लावारिस नवजात शिशु का पालन पोषण कर रहा है। इसकी भनक लगते ही संस्थाओं के सदस्य नवजात को लेने के लिए चोलापुर थाने के अलवा राजकुमारी के घर चक्कर काटने लगे। संस्थाओं के सदस्यों ने मंगलवार को थाने पर नवजात को हासिल करने का प्रयास किया। अपना दावा करने के चक्कर में वे आपस में ही उलझ पड़े। थानाध्यक्ष श्यामबहादुर यादव ने नवजात को लाने के लिए पुलिस को राजकुमारी के घर भेजा लेकिन शिशु को एसडीएम सदर के पास ले जाने की बात कहकर बच्चे को देने से इनकार कर दिया। पूरे दिन मशक्कत करने के बाद आखिरकार दोनों एनजीओ के सदस्यों को लौटना पड़ा। राजकुमारी के इकलौते जवान पुत्र आशीष (26) की बीमारी से मौत हो चुकी है। अब सिर्फ तीन बेटियां हैं। ऐसे में नवजात को पाकर राजकुमारी खुश हो गई और उसे पुत्र की तरह पालने का निर्णय लिया। उसके पति ने अदालत में अपील कर नवजात को पालन पोषण और वारिस बनाने की अनुमति मांगी है। उधर, थानाध्यक्ष श्याम बहादुर यादव का कहना है कि नियमानुसार नवजात को चाइल्ड लाइन के सुपुर्द किया जाएगा। चाइल्ड लाइन उसे बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सुपुर्द करेगी जहां से यह तय किया जाएगा कि नवजात को किसे सुपुर्द किया जाएगा।
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चोलापुर थाना क्षेत्र में नवजात के पाए जाने की सूचना समिति को मिली है। सोमवार को ही चोलापुर पुलिस को बच्चे को सीडब्ल्यूसी के समक्ष प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया। बच्चा किस संस्था के हवाले किया जाएगा यह सीडब्ल्यूसी ही तय करेगी।
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रेखा श्रीवास्तव, स्पेशल मजिस्ट्रेट, बाल कल्याण समिति
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चोलापुर (गोला) गांव के कुछ लोगों ने 20 नवंबर की भोर में नाद नदी के पास सड़क के किनारे पड़े नवजात शिशु को देखा था। जानकारी होने पर पहुंची इसी गांव की राजकुमारी ने नवजात को पालन पोषण के लिए ले लिया। राजकुमारी का पति बाबूराम सरोज चंदौली के नौबतपुर में वाणिज्यकर विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है। उसने डीएम और अन्य उच्चाधिकारियों को सूचना दी कि वह लावारिस नवजात शिशु का पालन पोषण कर रहा है। इसकी भनक लगते ही संस्थाओं के सदस्य नवजात को लेने के लिए चोलापुर थाने के अलवा राजकुमारी के घर चक्कर काटने लगे। संस्थाओं के सदस्यों ने मंगलवार को थाने पर नवजात को हासिल करने का प्रयास किया। अपना दावा करने के चक्कर में वे आपस में ही उलझ पड़े। थानाध्यक्ष श्यामबहादुर यादव ने नवजात को लाने के लिए पुलिस को राजकुमारी के घर भेजा लेकिन शिशु को एसडीएम सदर के पास ले जाने की बात कहकर बच्चे को देने से इनकार कर दिया। पूरे दिन मशक्कत करने के बाद आखिरकार दोनों एनजीओ के सदस्यों को लौटना पड़ा। राजकुमारी के इकलौते जवान पुत्र आशीष (26) की बीमारी से मौत हो चुकी है। अब सिर्फ तीन बेटियां हैं। ऐसे में नवजात को पाकर राजकुमारी खुश हो गई और उसे पुत्र की तरह पालने का निर्णय लिया। उसके पति ने अदालत में अपील कर नवजात को पालन पोषण और वारिस बनाने की अनुमति मांगी है। उधर, थानाध्यक्ष श्याम बहादुर यादव का कहना है कि नियमानुसार नवजात को चाइल्ड लाइन के सुपुर्द किया जाएगा। चाइल्ड लाइन उसे बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सुपुर्द करेगी जहां से यह तय किया जाएगा कि नवजात को किसे सुपुर्द किया जाएगा।
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चोलापुर थाना क्षेत्र में नवजात के पाए जाने की सूचना समिति को मिली है। सोमवार को ही चोलापुर पुलिस को बच्चे को सीडब्ल्यूसी के समक्ष प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया। बच्चा किस संस्था के हवाले किया जाएगा यह सीडब्ल्यूसी ही तय करेगी।
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रेखा श्रीवास्तव, स्पेशल मजिस्ट्रेट, बाल कल्याण समिति