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मर्ज बढ़ता गया ज्यों ज्यों दवा की
Varanasi
Updated Tue, 26 Nov 2013 05:43 AM IST
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वाराणसी। महिला सुरक्षा के लिए तमाम सरकारी दावों और कानूनों के बावजूद जिले में महिला उत्पीड़न और दहेज हत्या जैसी घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। पिछले साल की तुलना में इस वर्ष महिला उत्पीड़न और दहेज हत्या से जुड़ी घटनाओं में दोगुने से ज्यादा की वृद्धि हुई है। शहर के महिला थाने में दर्ज मामले इस बात के गवाह हैं। यही नहीं शैक्षणिक संस्थाआें में भी महिला उत्पीड़न की घटनाएं थम नहीं रही हैं।
महिला थाने में वर्ष 2012 में महिला उत्पीड़न और दहेज से जुडे़ 13 मामले दर्ज कराए गए थे। इस बीच जनवरी 2013 से अब तक 32 मामले दर्ज कराए गए हैं जिसमें 28 दहेज उत्पीड़न, एक बलात्कार, एक छेड़खानी और दो पारिवारिक मारपीट की घटनाएं शामिल हैं। इसी प्रकार बीएचयू के महिला यौन उत्पीड़न सेल में 2012 में नौ मामले दर्ज कराए गए थे जो इस वर्ष अब तक बढ़कर 13 हो गए हैं। जानकाराें का कहना है कि यह वह आंकड़ा है जो महिला थाने और सेल में दर्ज होता है जबकि घरेलू हिंसा की शिकार अधिकांश महिलाआें के मामले दबा दिए जाते हैं। इसमें पुलिस की भी भूमिका संदिग्ध होती है। बीएचयू महिला अध्ययन केंद्र की समन्वय डा. रीता सिंह का कहना है कि लोगाें की मानसिकता में बदलाव करके ही महिला हिंसा पर नियंत्रण किया जा सकता है। बताया कि पहले से लोगाें में इसके प्रति जागरूकता जरूर आई है लेकिन हिंसा की घटनाएं थम नहीं रही हैं। यह चिंताजनक है।
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महिला हिंसा से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें:
नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार भारत में प्रतिदिन औसतन 22 महिलाएं दहेज हत्या का शिकार बनती हैं। 43.6 फीसदी महिलाआें के साथ अपराध उनके रिश्तेदाराें द्वारा किया जाता है। 2012 में बलात्कार के 24 हजार 923 मामले सामने आए हैं जिसमें से 98 प्रतिशत केसाें में अपराधी जान पहचान का व्यक्ति था।
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लिंगानुपात में है अंतर:
देश में 2011 की जनगणना के अनुसार जहां ग्रामीण क्षेत्राें में लिंगानुपात 969 है वहीं शहरी क्षेत्रों में यह 929 ही है। 2001 की जनगणना की तुलना में शिशु लिंगानुपात में आठ अंकाें की गिरावट आई है। देश के सभी राज्याें एवं संघीय क्षेत्राें में उत्तर प्रदेश का लिंगानुपात व शिशु लिंगानुपात दोनाें ही संदर्भों में 26 वां स्थान है। इसमें यूपी के गौतमबुद्धनगर, हमीरपुर, बागपत, कानपुर नगर और बांदा जिले सबसे निचले क्रम में हैं।
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महिला थाने में वर्ष 2012 में महिला उत्पीड़न और दहेज से जुडे़ 13 मामले दर्ज कराए गए थे। इस बीच जनवरी 2013 से अब तक 32 मामले दर्ज कराए गए हैं जिसमें 28 दहेज उत्पीड़न, एक बलात्कार, एक छेड़खानी और दो पारिवारिक मारपीट की घटनाएं शामिल हैं। इसी प्रकार बीएचयू के महिला यौन उत्पीड़न सेल में 2012 में नौ मामले दर्ज कराए गए थे जो इस वर्ष अब तक बढ़कर 13 हो गए हैं। जानकाराें का कहना है कि यह वह आंकड़ा है जो महिला थाने और सेल में दर्ज होता है जबकि घरेलू हिंसा की शिकार अधिकांश महिलाआें के मामले दबा दिए जाते हैं। इसमें पुलिस की भी भूमिका संदिग्ध होती है। बीएचयू महिला अध्ययन केंद्र की समन्वय डा. रीता सिंह का कहना है कि लोगाें की मानसिकता में बदलाव करके ही महिला हिंसा पर नियंत्रण किया जा सकता है। बताया कि पहले से लोगाें में इसके प्रति जागरूकता जरूर आई है लेकिन हिंसा की घटनाएं थम नहीं रही हैं। यह चिंताजनक है।
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महिला हिंसा से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें:
नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार भारत में प्रतिदिन औसतन 22 महिलाएं दहेज हत्या का शिकार बनती हैं। 43.6 फीसदी महिलाआें के साथ अपराध उनके रिश्तेदाराें द्वारा किया जाता है। 2012 में बलात्कार के 24 हजार 923 मामले सामने आए हैं जिसमें से 98 प्रतिशत केसाें में अपराधी जान पहचान का व्यक्ति था।
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लिंगानुपात में है अंतर:
देश में 2011 की जनगणना के अनुसार जहां ग्रामीण क्षेत्राें में लिंगानुपात 969 है वहीं शहरी क्षेत्रों में यह 929 ही है। 2001 की जनगणना की तुलना में शिशु लिंगानुपात में आठ अंकाें की गिरावट आई है। देश के सभी राज्याें एवं संघीय क्षेत्राें में उत्तर प्रदेश का लिंगानुपात व शिशु लिंगानुपात दोनाें ही संदर्भों में 26 वां स्थान है। इसमें यूपी के गौतमबुद्धनगर, हमीरपुर, बागपत, कानपुर नगर और बांदा जिले सबसे निचले क्रम में हैं।