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न्यायालय ने दिया है स्टे तो फिर वारंट कैसे ?

Fri, 25 Oct 2013 05:40 AM IST
Varanasi
Varanasi Updated Fri, 25 Oct 2013 05:40 AM IST
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वाराणसी। बीएचयू के पीपीपी सेल के चेयरमैन प्रो. रवि प्रताप सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की ओर से कुलपति डा. लालजी सिंह को पूर्व में जारी गिरफ्तारी वारंट के मामले में चार जुलाई को कोर्ट ने स्थगन आदेश दे दिया है। इसके बावजूद फिर दोबारा वारंट कैसे जारी किया जा सकता है।
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उन्हाेंने कहा कि गत 19 जून को आयोग ने पूरी तरह जांच किए बगैर वारंट जारी कर दिया था। इस आदेश के विरुद्ध विश्वविद्यालय ने दो जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की। चार जुलाई को कोर्ट ने वारंट और कुलपति को आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से प्रस्तुत होने पर रोक लगा दी। इस दौरान बीएचयू के वकील ने कोर्ट को अवगत कराया गया कि विश्वविद्यालय के कुलसचिव, उप कुलसचिव और सहायक कुलसचिव ने आयोग द्वारा भेजे गए प्रत्येक समन का सम्यक एवं उचित दस्तावेज प्रस्तुत किए गए लेकिन आयोग के चेयरमैन ने उसे संज्ञान में नहीं लिया। कोर्ट को वकील ने यह भी बताया कि समस्त दस्तावेजाें के कस्टोडियन कुलसचिव होते हैं। कोर्ट के स्थगन आदेश के बावजूद तीन अक्तूबर को आयोग ने कुलपति के खिलाफ फिर समन जारी कर सात अक्तूबर को पेश होने का आदेश दिया। इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से सात अक्तूबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की गई, जिस पर कोर्ट ने 10 अक्तूबर को आयोग को नोटिस जारी किया है।
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कुलपति की गिरफ्तारी के लिए पुलिस तैयार
वाराणसी। एसएसपी अजय कुमार मिश्रा ने स्पष्ट किया कि डीजीपी के माध्यम से पुलिस को बीएचयू कुलपति डॉ. लालजी सिंह को गिरफ्तार कर पेश करने का आदेश मिला है। अभी तक कुलपति की तरफ से अदालत का कोई स्थगनादेश उन्हें नहीं मिला है।
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बता दें कि डीजीपी कार्यालय के सहायक आईजी वीपी जोगदंड ने एसएसपी को पत्र भेजकर बताया है कि राष्ट्रीय अनुसूचित आयोग ने कुलपति के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। इस मामले में उन्होंने डीजीपी को पत्र भेजकर गिरफ्तार करने और 28 अक्तूबर को पेश करने का निर्देश दिया है। एसएसपी अजय कुमार मिश्रा का कहना है कि चूंकि कुलपति एक सम्मानित व्यक्ति हैं लेकिन कानून सभी के लिए बराबर है। इस मामले में कोर्ट से स्थगनादेश न मिलने पर गिरफ्तारी की जाएगी।
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