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संभल कर करें ई-बैंकिंग
Varanasi
Updated Thu, 04 Jul 2013 05:30 AM IST
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वाराणसी। मऊ जिले के घोसी में एक व्यक्ति के एकाउंट से 47 हजार रुपये गायब हो गए। खोजबीन करने पर पता चला कि यह रकम इंटरनेट बैंकिंग के जरिये धोखाधड़ी कर निकाली गई। फ्राड करने वाले ने खुद को बैंक का अधिकारी बताकर खातेदार से कुछ गोपनीय सूचनाएं मांगी और एकाउंट से रकम उड़ा ली। ऑनलाइन बैंकिंग, डेबिट और क्रेडिट कार्ड ने भले ही बैंकों से लेन-देन आसान कर दिया हो, लेकिन इसके चलते एकाउंट पर खतरे भी बढ़ते जा रहे हैं। आए दिन धोखाधड़ी के मामले प्रकाश में आ रहे हैं। इससे बैंक के आला अफसर भी चिंतित हैं।
धोखाधड़ी करने वाले ज्यादातर ई-मेल का सहारा लेते हैं। ये फर्जी नामों से ई-मेल आईडी बनाकर लोगों से संपर्क करते हैं। उनसे तरह-तरह की गोपनीय सूचनाएं मांगते हैं। फिर इस सूचना का दुरुपयोग कर पैसे निकाल लेते हैं। इसे फिशिंग कहा जाता है। बैंक अधिकारियों का कहना है कि अपराधी बैंक के नाम से मिलती-जुलती वेबसाइट या ई-मेल आईडी बनाकर लोगों को चूना लगाते हैं। जैसे ही ग्राहक वेबसाइट या ई-मेल पर सूचनाएं देते हैं, अपराधी उसे टेप कर लेते हैं। फिर वे इसका दुरुपयोग टेलीशापिंग, एयर टिकट मनी ट्रांसफर आदि के लिए करते हैं। विदेशों में पिरामिड योजना फ्राड, पोजी फ्राड आर जंक मेल फ्राड के माध्यम से खातेदारों से अरबों रुपये ऐंठे जा चुके हैं।
भारतीय स्टेट बैंक की बलिया सिटी शाखा के अधिकारी उमेश कुमार ने बताया कि फिशिंग, मेलवेयर, टारजन, स्किमिग, नाइजीरियन ई-फ्राड जैसी धोखाधड़ी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। हैकर्स ने कई बार बैंकों की वेबसाइट भी हैक करने की कोशिश की लेकिन इसमें उन्हें कामयाबी नहीं मिली।
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भारतीय रिजर्व बैंक ग्राहकों को जागरूक कर रहा है। उन्हें इस तरह के मामलों से बचने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भारतीय स्टेट बैंक ने तो अपने अधिकारियों और ग्राहकों को जागरूक करने के लिए अपनी इन हाउस पत्रिका में इस बारे में विस्तार से चर्चा की है।
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इनसेट---
धोखाधड़ी से बचने के उपाय
- बैंक कभी गोपनीय सूचनाएं नहीं मांगते, मांगे तो सचेत हो जाएं
- किसी को भी ऑनलाइन न दें अपने खाते की सूचनाएं
- मेल का सत्यापन संबंधित बैंक अधिकारियों से जरूर कराएं
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धोखाधड़ी करने वाले ज्यादातर ई-मेल का सहारा लेते हैं। ये फर्जी नामों से ई-मेल आईडी बनाकर लोगों से संपर्क करते हैं। उनसे तरह-तरह की गोपनीय सूचनाएं मांगते हैं। फिर इस सूचना का दुरुपयोग कर पैसे निकाल लेते हैं। इसे फिशिंग कहा जाता है। बैंक अधिकारियों का कहना है कि अपराधी बैंक के नाम से मिलती-जुलती वेबसाइट या ई-मेल आईडी बनाकर लोगों को चूना लगाते हैं। जैसे ही ग्राहक वेबसाइट या ई-मेल पर सूचनाएं देते हैं, अपराधी उसे टेप कर लेते हैं। फिर वे इसका दुरुपयोग टेलीशापिंग, एयर टिकट मनी ट्रांसफर आदि के लिए करते हैं। विदेशों में पिरामिड योजना फ्राड, पोजी फ्राड आर जंक मेल फ्राड के माध्यम से खातेदारों से अरबों रुपये ऐंठे जा चुके हैं।
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भारतीय स्टेट बैंक की बलिया सिटी शाखा के अधिकारी उमेश कुमार ने बताया कि फिशिंग, मेलवेयर, टारजन, स्किमिग, नाइजीरियन ई-फ्राड जैसी धोखाधड़ी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। हैकर्स ने कई बार बैंकों की वेबसाइट भी हैक करने की कोशिश की लेकिन इसमें उन्हें कामयाबी नहीं मिली।
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भारतीय रिजर्व बैंक ग्राहकों को जागरूक कर रहा है। उन्हें इस तरह के मामलों से बचने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भारतीय स्टेट बैंक ने तो अपने अधिकारियों और ग्राहकों को जागरूक करने के लिए अपनी इन हाउस पत्रिका में इस बारे में विस्तार से चर्चा की है।
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धोखाधड़ी से बचने के उपाय
- बैंक कभी गोपनीय सूचनाएं नहीं मांगते, मांगे तो सचेत हो जाएं
- किसी को भी ऑनलाइन न दें अपने खाते की सूचनाएं
- मेल का सत्यापन संबंधित बैंक अधिकारियों से जरूर कराएं