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विभाग ही कंगाल तो कैसे मिले पानी

Thu, 28 Mar 2019 02:07 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 28 Mar 2019 02:07 AM IST
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विभाग ही कंगाल तो कैसे मिले पानी
पीयूष तिवारी
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वाराणसी। काशी के स्मार्ट सिटी बनने के सपने देखे जा रहे हैं, लेकिन हकीकत में यहां लोगों को शुद्ध पेयजल तक नसीब नहीं होता है। पानी की आपूर्ति करने वाले विभाग जलकल की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि या तो वह कर्मचारियों को वेतन दे सकता है या पाइप लाइनों की मरम्मत करा सकता है।
अधिकारियों की लापरवाही और इच्छा शक्ति के अभाव में जितने घरों से गृह कर की वसूली होती है, उतने भवनों से जल कर की वसूली नहीं हो पा रही है। ऐसे में विभाग कंगाली के दौर से गुजर रहा है। विभाग के अधिकारियों ने स्थानीय मंत्री, नगर विकास मंत्री से लेकर शासन प्रशासन तक आर्थिक मदद की गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई मदद नहीं मिली है।
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प्रदेश भर के जल संस्थानों को नगर निगम में समायोजित कर जलकल विभाग बनाया गया, ताकि नगर निगम जलकल के साथ सहयोग कर व्यवस्थाएं सुधारे, लेकिन नगर निगम से आर्थिक मदद नहीं मिलने से जलकल विभाग घाटे में चला गया और हालात सुधरने के बजाय और बदतर हो गई। जलकल के हालात ऐसे हैं कि पाइप लाइनों की मरम्मत कराए तो कर्मचारी वेतन के मोहताज और वेतन का भुगतान कर दे तो शहर पानी के लिए परेशान हो जाए। वर्तमान स्थिति यह है कि एक माह से न तो कर्मचारियों को वेतन मिला है और न ही मरम्मत हो पा रही है। जब जल संस्थान था तो अपने अधिकारों के अनुसार फैसला भी लेता था, जल कर बढ़ाने से लेकर योजनाएं भी लागू करने का अधिकार था, लेकिन अब वह नगर निगम के एक विभाग के रूप में काम करता है।
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ये है जलकल की आर्थिक स्थिति
नियमानुसार जितने भवनों से गृह कर की वसूली की जाती, उतने ही भवनों से जल कर लिया जाना चाहिए। वास्तविक स्थिति यह है कि नगर निगम 1.98 लाख भवनों से गृह कर वसूलता है, जबकि जलकल मात्र 1.53 लाख भवनों की बिलिंग करता है। 45 हजार भवनों की बिलिंग कम होने से जलकल विभाग 36 करोड़ रुपये की ही सालाना वसूली कर पाता है। जबकि वेतन, एरियर, मानदेय, मरम्मत और अन्य कार्यों पर विभाग को प्रति वर्ष 50 करोड़ रुपये की जरूरत पड़ती है।
वेतन और मानदेय पर खर्च होते हैं 36 करोड़
जलकल में 1,117 पद स्वीकृत हैं, जबकि कुल 423 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। इन कर्मचारियों के मानदेय पर ही 36 करोड़ रुपये खर्च हो जाते हैं। जल कर वसूली भी 36 करोड़ होने के कारण सेवानिवृत्त कर्मचारियों का एरियर का भुगतान नहीं किया जा सका और विभाग पर करीब 10 करोड़ रुपये एरियर का बकाया है। यही नहीं, वाहनों और मशीनों के संचालन के लिए भी प्रति वर्ष करीब 10 करोड़ रुपये की जरूरत होती है।

सेवानिवृत्त होने के पांच साल बाद मिल रहा एरियर
जलकल की माली हालत का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों का एरियर पांच साल बाद दिया जा रहा है। 2014 में जो सेवानिवृत्त हुए हैं उन्हें इस साल एरियर दिया गया है। एरियर के लिए सेवानिवृत्त कर्मचारियों को न्यायालय का सहारा लेना पड़ रहा है। न्यायालय का आदेश आता है तो कर्मचारियों का वेतन रोककर एरियर का भुगतान किया जा रहा है।
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