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नारी-पुरुष समानता के हक में है कोर्ट का फैसला
Updated Sun, 07 Oct 2018 01:44 AM IST
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वाराणसी। भगत सिंह आंबेडकर विचार मंच और परिवर्तनकामी विद्यार्थी मोर्चा की ओर से शनिवार को आयोजित संवाद कार्यक्रम में हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर चर्चा की गई। बतौर मुख्य वक्ता बीएचयू विधि संकाय के प्रोफेसर एमपी सिंह ने कहा कि वैवाहिक कानून में बदलाव और सबरीमाला के मुद्दे पर आए फैसले नारी-पुरुष समानता के हक में हैं।
लंका स्थित स्वयंवर वाटिका में आयोजित कार्यक्रम में प्रो. सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसले में केरल के सबरीमाला मंदिर को महिला श्रद्धालुओं के लिए खोलने का आदेश दिया है, जहां विशेष आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर रोक थी। वैवाहिक कानून पर प्रो. सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 1860 में बने 158 साल पुराने वैवाहिक कानून में तब्दीली करते हुए; व्यभिचार से संबंधित आईपीसी की धारा 497 को असंवैधानिक करार दिया है। इसमें कोर्ट ने कहा कि अडल्ट्री तलाक का आधार हो सकता है, लेकिन अपराध नहीं। कार्यक्रम का संचालन करते हुए बीएचयू के पूर्व छात्रनेता सुनील यादव ने भी समलैंगिता, आरक्षण, वैवाहिक कानून में बदलाव आदि पर अपने विचार रखे। बताया कि संवेदनशील सवालों पर समझ बनाने के लिए कोशिश होगी कि संवाद का यह सिलसिला जारी रहे। इस दौरान एसपी राय, कुलदीप मीणा, प्रवीण नाथ, भुवाल यादव आदि मौजूद रहे।
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लंका स्थित स्वयंवर वाटिका में आयोजित कार्यक्रम में प्रो. सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसले में केरल के सबरीमाला मंदिर को महिला श्रद्धालुओं के लिए खोलने का आदेश दिया है, जहां विशेष आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर रोक थी। वैवाहिक कानून पर प्रो. सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 1860 में बने 158 साल पुराने वैवाहिक कानून में तब्दीली करते हुए; व्यभिचार से संबंधित आईपीसी की धारा 497 को असंवैधानिक करार दिया है। इसमें कोर्ट ने कहा कि अडल्ट्री तलाक का आधार हो सकता है, लेकिन अपराध नहीं। कार्यक्रम का संचालन करते हुए बीएचयू के पूर्व छात्रनेता सुनील यादव ने भी समलैंगिता, आरक्षण, वैवाहिक कानून में बदलाव आदि पर अपने विचार रखे। बताया कि संवेदनशील सवालों पर समझ बनाने के लिए कोशिश होगी कि संवाद का यह सिलसिला जारी रहे। इस दौरान एसपी राय, कुलदीप मीणा, प्रवीण नाथ, भुवाल यादव आदि मौजूद रहे।
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