भारत के पास ज्ञान और संस्कृति का खजाना

Varanasi Bureauवाराणसी ब्यूरो Updated Wed, 26 Sep 2018 02:08 AM IST
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वाराणसी। भारत ज्ञान और संस्कृति का खजाना है। दुनिया को देने के लिए भारत के पास बहुत कुछ है। ऐसे में भारत को एक महत्वपूर्ण राष्ट्र बनकर दुनिया की मदद करनी है। बीएचयू के केएन उडुप्पा सभागार में राजनीति शास्त्र विभाग की ओर से आयोजित व्याख्यान में ये बातें सामाजिक विचारक सुनील आंबेकर ने कहीं।
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उन्होंने कहा कि हमारा देश एक सर्वस्पर्शी, सर्वसमावेशी और सर्वग्राही राष्ट्र है। हमें चाहिए कि हम भारत को भारत की दृष्टि से देखें। इसकी समस्त मूल्यों को जीएं। एकत्व भाव से हम जाने जाएं। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. विद्युत चक्रवर्ती ने कहा कि आधुनिक लोकतांत्रिक राष्ट्र स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व ही भारत की पहचान रही है। विशिष्ट अतिथि प्रो. आशिम मुखर्जी ने कहा कि भाषा को धर्मभाव से आत्मसात करते हुए विश्व के समक्ष हमें मजबूती से खड़े रहना होगा। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने कहा कि हम अपना अतीत भूलते जा रहे हैं। हम अपनी सांस्कृतिक मूल्यों और आदर्शों का सम्मान और पालन करें। संयोजन और संचालन प्रो. संजय श्रीवास्तव ने किया। स्वागत संकाय प्रमुख प्रो. आरपी पाठक ने किया। प्रो. आरपी सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
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