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फातमान में कब्र खुदाई के दौरान मिले चांदी के 42 सिक्के
Updated Mon, 27 Aug 2018 02:08 AM IST
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वाराणसी। सिगरा थाना अंतर्गत फातमान स्थित कब्रिस्तान में रविवार को कब्र खोदे जाने के दौरान गुल्लक से चांदी के 42 सिक्के मिले। सौ नंबर पर दी गई सूचना पर सिगरा पुलिस ने सिक्कों को कब्जे में लेकर थाने के मालखाने में रखवा दिया। सोमवार को सिक्कों को राजकीय कोषागार में जमा कराया जाएगा और भारतीय पुरातत्व एवं सर्वेक्षण इकाई की मदद से पता कराया जाएगा कि यह सिक्के कब के हैं। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार एम्प्रेस और किंग लिखे यह चांदी के सिक्के 18वीं और 19वीं सदी के बीच के हैं।
बादशाह बाग निवासी असलम भाई की रविवार को मौत हो गई थी। फातमान स्थित कब्रिस्तान में असलम भाई को सुपुर्द-ए-खाक करने के लिए लल्लापुरा निवासी मल्लू कब्र खोद रहा था। कब्र की खुदाई के दौरान ही मल्लू का फावड़ा गुल्लक के जैसे मिट्टी के बर्तन से टकराया। इस पर गुल्लक को बाहर निकाला गया तो वह क्षतिग्रस्त हो गया था लेकिन उससे चांदी के 42 सिक्के निकले। मामला सार्वजनिक होते ही मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और सूचना पुलिस को दी गई। इस संबंध में एसीएम तृतीय एके गुप्ता ने बताया कि सिक्कों को फिलहाल पुलिस अभिरक्षा में रखा गया है। सिक्के 1892, 1888, 1907 सहित अगल-अलग वर्षों के हैं। इनकी वास्तविकता के बारे में भारतीय पुरातत्व एवं सर्र्वेक्षण इकाई के अधिकारी ही सही से बता पाएंगे और इस इलाके का सर्वे भी कराया जाएगा।
फातमान क्षेत्र में रहने वाले लोगों के अनुसार यहां का कब्रिस्तान 250 वर्ष से ज्यादा पुराना है। भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के अलावा यहां नर्तकी उमराव जान की भी कब्र है। रविवार को सिक्के मिलने की सूचना पर पहुंचे क्षेत्रीय लोगों का कहना था कि फातमान स्थित कब्रिस्तान ऐतिहासिक महत्व का है और इसके संरक्षण के पर्याप्त उपाय किए जाने चाहिए।
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बादशाह बाग निवासी असलम भाई की रविवार को मौत हो गई थी। फातमान स्थित कब्रिस्तान में असलम भाई को सुपुर्द-ए-खाक करने के लिए लल्लापुरा निवासी मल्लू कब्र खोद रहा था। कब्र की खुदाई के दौरान ही मल्लू का फावड़ा गुल्लक के जैसे मिट्टी के बर्तन से टकराया। इस पर गुल्लक को बाहर निकाला गया तो वह क्षतिग्रस्त हो गया था लेकिन उससे चांदी के 42 सिक्के निकले। मामला सार्वजनिक होते ही मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और सूचना पुलिस को दी गई। इस संबंध में एसीएम तृतीय एके गुप्ता ने बताया कि सिक्कों को फिलहाल पुलिस अभिरक्षा में रखा गया है। सिक्के 1892, 1888, 1907 सहित अगल-अलग वर्षों के हैं। इनकी वास्तविकता के बारे में भारतीय पुरातत्व एवं सर्र्वेक्षण इकाई के अधिकारी ही सही से बता पाएंगे और इस इलाके का सर्वे भी कराया जाएगा।
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फातमान क्षेत्र में रहने वाले लोगों के अनुसार यहां का कब्रिस्तान 250 वर्ष से ज्यादा पुराना है। भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के अलावा यहां नर्तकी उमराव जान की भी कब्र है। रविवार को सिक्के मिलने की सूचना पर पहुंचे क्षेत्रीय लोगों का कहना था कि फातमान स्थित कब्रिस्तान ऐतिहासिक महत्व का है और इसके संरक्षण के पर्याप्त उपाय किए जाने चाहिए।
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