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ठेकदारों की मनमानी से बिजली आपूर्ति का बंटाधार
Updated Mon, 28 May 2018 12:27 AM IST
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ज्ञानपुर/मोढ़। भीषण गर्मी में अघोषित कटौती की मार से जूझ रहे लोगों को ठेकेदारों की मनमानी से भी दो-चार होना पड़ रहा है। फीडर पर काम कर रहे ठेका कर्मचारियों को ठेकेदार समय से मानदेय नहीं दे रहे, जिसकी वजह से वे नियमित रूप से काम पर नहीं पहुंच रहे हैं। इससे मामूली खामियों को भी दुरुस्त करने में दो से तीन दिन का समय लग जा रहा है।
शासन की मंशा है कि शहर से लेकर गांव तक निर्धारित रोस्टर के हिसाब से बिजली आपूर्ति हो लेकिन गर्मी में अघोषित कटौती से हर कोई बेहाल हो रहा है। जिले में 25 से अधिक उपकेंद्रों और 50 से अधिक फीडरों से बिजली आपूर्ति की जिम्मेदारी ठेकेदारों को दी गई है। ठेकेदार निजी कर्मचारियों को रखकर काम कराते हैं, जिस पर हर साल सरकार लाखों रुपए खर्च करती है। ठेके के अनुरूप हर महीने विभाग से लाखों रुपये का भुगतान कराने के बाद ठेकेदार निजी कर्मचारियों को समय पर मानदेय नहीं देते। आरोप तो यह भी है कि कर्मचारियों के मानदेय में कटौती भी कर लेते हैं। इसके चलते ये कर्मचारी काम छोड़ दे रहे हैं। ऐसे में मामूली फाल्ट भी समय से दुरुस्त नहीं हो पाते। मोढ़ के बरदहवां, अभोली, वहिदानगर, कटरा फीडरों में कमोबेश ऐसी ही स्थिति है। बरदहवां फीडर पर काम करने वाले कर्मचारी संदीप की नौ मई की करेंट लगने से मौत हो गई थी। उस घटना के बाद उक्त फीडर के ज्यादातर दैनिक कर्मी काम पर आना बंद कर दिए। कई कर्मचारी मानदेय न मिलने से भी काम से किनारा कर लिए हैं। इससे यहां तकनीकी दिक्कत समय से दूर नहीं हो पा रही है। जिसके चलते फीडर से जुड़े 30 से 40 गावों की आपूर्ति अक्सर बेपटरी हो जाती है। इलाके के सतीश सिंह और घनश्याम ने जिलाधिकारी से मांग किया कि ठेकेदारों पर सख्ती बरती जाए और आपूर्ति को बेहतर किया जाए। जेई ओपी कन्नौजिया ने बताया कि ठेकेदार का कहना है कि उसका टेंडर खत्म हो गया है, इसलिए वह कार्य नहीं करा सकता। अधिशासी अभियंता अमर सिंह ने कहा कि रोस्टर के अनुसार आपूर्ति देने का प्रयास किया जाता है। कुछ फीडरों का टेंडर खत्म हो चुका है, उसे कराकर व्यवस्था में सुधार किया जाएगा।
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शासन की मंशा है कि शहर से लेकर गांव तक निर्धारित रोस्टर के हिसाब से बिजली आपूर्ति हो लेकिन गर्मी में अघोषित कटौती से हर कोई बेहाल हो रहा है। जिले में 25 से अधिक उपकेंद्रों और 50 से अधिक फीडरों से बिजली आपूर्ति की जिम्मेदारी ठेकेदारों को दी गई है। ठेकेदार निजी कर्मचारियों को रखकर काम कराते हैं, जिस पर हर साल सरकार लाखों रुपए खर्च करती है। ठेके के अनुरूप हर महीने विभाग से लाखों रुपये का भुगतान कराने के बाद ठेकेदार निजी कर्मचारियों को समय पर मानदेय नहीं देते। आरोप तो यह भी है कि कर्मचारियों के मानदेय में कटौती भी कर लेते हैं। इसके चलते ये कर्मचारी काम छोड़ दे रहे हैं। ऐसे में मामूली फाल्ट भी समय से दुरुस्त नहीं हो पाते। मोढ़ के बरदहवां, अभोली, वहिदानगर, कटरा फीडरों में कमोबेश ऐसी ही स्थिति है। बरदहवां फीडर पर काम करने वाले कर्मचारी संदीप की नौ मई की करेंट लगने से मौत हो गई थी। उस घटना के बाद उक्त फीडर के ज्यादातर दैनिक कर्मी काम पर आना बंद कर दिए। कई कर्मचारी मानदेय न मिलने से भी काम से किनारा कर लिए हैं। इससे यहां तकनीकी दिक्कत समय से दूर नहीं हो पा रही है। जिसके चलते फीडर से जुड़े 30 से 40 गावों की आपूर्ति अक्सर बेपटरी हो जाती है। इलाके के सतीश सिंह और घनश्याम ने जिलाधिकारी से मांग किया कि ठेकेदारों पर सख्ती बरती जाए और आपूर्ति को बेहतर किया जाए। जेई ओपी कन्नौजिया ने बताया कि ठेकेदार का कहना है कि उसका टेंडर खत्म हो गया है, इसलिए वह कार्य नहीं करा सकता। अधिशासी अभियंता अमर सिंह ने कहा कि रोस्टर के अनुसार आपूर्ति देने का प्रयास किया जाता है। कुछ फीडरों का टेंडर खत्म हो चुका है, उसे कराकर व्यवस्था में सुधार किया जाएगा।
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