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कुलपति को विदाई देने उमड़े शिक्षक-छात्र

Mon, 27 Nov 2017 02:22 AM IST
Updated Mon, 27 Nov 2017 02:22 AM IST
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कुलपति को विदाई देने उमड़े शिक्षक-छात्र
वाराणसी। बीएचयू में कुलपति प्रो.जीसी त्रिपाठी के कार्यकाल के अंतिम दिन आयोजित विदाई समारोह में शिक्षकों-छात्रों ने उन्हें भावभीनी विदाई दी। केएन उडप्पा सभागार में आयोजित समारोह में विभिन्न संस्थानों के निदेशकों ने कुलपति की ओर से किए गए कार्यों और उपलब्धियाें की विस्तृत चर्चा की। उधर कुलपति ने भी कैंसर संस्थान बनने, अस्पताल में नर्सों की कमी, प्रवेश, परीक्षा और परिणाम समय पर जारी किए जाने सहित कई महत्वपूर्ण फैसलों को गिनाया। कहा कि बीएचयू कैंपस शिक्षा का समग्र मॉडल है और इसे बनाए रखना सभी की अहम जिम्मेदारी है।
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सभागार में कुलपति ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 800 करोड़ रुपये के कैंसर संस्थान के प्रोजेक्ट को बीएचयू को दिया, यह बड़ी उपलब्धि है। बीएचयू दूसरे विश्वविद्यालयों से हर मामले में अलग है। कोई विचार, संस्था, देश और समाज ऐसा नहीं होगा जिसमें पूर्णता हो और पूर्ण शुद्धता हो। कुलपति ने विश्वविद्यालय की स्थापना के पीछे महामना की सोच की चर्चा करते हुए कहा कि यहां आने पर पता चला कि सच में विश्वविद्यालय कहलाने का अधिकार काशी हिंदू विश्वविद्यालय को ही है। अगर विश्वविद्यालय में वैश्विक सोच,विचार नहीं है तो फिर वह विश्वविद्यालय नहीं है। कहा कि शिक्षा का यह कंपाटलाइजेशन चुनौती है। कहा कि विश्वविद्यालय अपनी संस्कृति की वजह से जाना जाता है और यह हर विश्वविद्यालय की एक संस्कृति हो, ऐसा नहीं हो सकता है। इसका निर्माण वहां पढ़ने-पढ़ाने और काम करने वाले लोग करते हैं। इस विश्वविद्यालय की जितनी बड़ी परंपरा है, उतनी कहीं नहीं। उन्होंने समय से प्रवेश, सेमेस्टर परीक्षा के साथ ही शिक्षण और शोध के क्षेत्र में हुए कार्यों के लिए सभी को बधाई दी। बताया कि शताब्दी वर्ष पर आयोजित कार्यक्रम भी बिना सबके सहयोग के नहीं हो सकता था क्योंकि इसके लिए प्रशासन ने हाथ खड़ा कर दिए थे। कहा कि पूर्व में किए गए प्रयासों के आधार पर बीएचयू देश का पहला शतप्रतिशत सौर ऊर्जा से संचालित परिसर होगा। यहां स्थापित भारत अध्ययन केंद्र, जलवायु परिवर्तन, कैंसर सेंटर, सुपर स्पेशियलिटी सेंटर आदि के जल्द ही सुखद परिणाम सामने आएंगे। इसके पहले उन्होंने मालवीय भवन में महामना की प्रतिमा पर माल्यार्पण भी किया। समारोह में संस्थानों के निदेशकों, वरिष्ठ आचार्यों ने अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया।
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