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सुख-शांति का साधन है विहंगम योग
Updated Sun, 26 Nov 2017 02:30 AM IST
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चौबेपुर। स्वर्वेद महामंदिर, उमरहां में तीन दिवसीय विहंगम योग समारोह एवं 5101 कुंडीय विश्व शांति वैदिक महायज्ञ के समापन अवसर पर शनिवार को देश-विदेश से आए लाखों अनुयायियों को आचार्य स्वतंत्र देव महाराज ने योग, साधना और भक्ति का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि विहंगम योग सुख, शांति और स्वास्थ्य का साधन है। सेवा, सत्संग और साधना की त्रिवेणी है विहंगम योग। साधक जब सिद्धासन पर बैठकर अपनी चेतना को गुरु उपदिष्ट भूमि पर केंद्रित करता है तो वह आंतरिक शांति का अनुभव करता है। फिर वह मानवीय गुणों से मंडित होकर दिव्य गुण स्वभाव वाला बन जाता है।
आचार्य ने कहा कि जब तक मानव मन में अशांति है तब तक विश्व में शांति की कल्पना नहीं की जा सकती। विहंगम योग की साधना से मन की अशांति को दूर किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि आत्मोद्धार का सर्वश्रेष्ठ साधन है भक्ति। आज की भक्ति अज्ञान और आडंबर से जड़ बन चुकी है। भक्ति के चेतन पथ पर अग्रसर होने की जरूरत है। इसके मौके पर अनुयायियों ने संत विज्ञान देव महाराज के समक्ष दोनों हाथों को उठाकर विहंगम योग को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। इसके बाद नीरज पांडेय, रवि शारदा और रंजू सिंह ने भजनों की प्रस्तुति से समारोह को यादगार बना दिया। इसमें हारमोनियम पर ऋषि, आर्गन पर प्रदीप, सितार पर अमित, तबले पर आत्माराम, बांसुरी पर रमेश, बेंजो पर सुधीर और पैड पर धनराज ने संगत की। अंत में वंदना, आरती और शांति पाठ के साथ समारोह का समापन हुआ।
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आचार्य ने कहा कि जब तक मानव मन में अशांति है तब तक विश्व में शांति की कल्पना नहीं की जा सकती। विहंगम योग की साधना से मन की अशांति को दूर किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि आत्मोद्धार का सर्वश्रेष्ठ साधन है भक्ति। आज की भक्ति अज्ञान और आडंबर से जड़ बन चुकी है। भक्ति के चेतन पथ पर अग्रसर होने की जरूरत है। इसके मौके पर अनुयायियों ने संत विज्ञान देव महाराज के समक्ष दोनों हाथों को उठाकर विहंगम योग को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। इसके बाद नीरज पांडेय, रवि शारदा और रंजू सिंह ने भजनों की प्रस्तुति से समारोह को यादगार बना दिया। इसमें हारमोनियम पर ऋषि, आर्गन पर प्रदीप, सितार पर अमित, तबले पर आत्माराम, बांसुरी पर रमेश, बेंजो पर सुधीर और पैड पर धनराज ने संगत की। अंत में वंदना, आरती और शांति पाठ के साथ समारोह का समापन हुआ।
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