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मनु की कृतियां देश की थाती
Updated Mon, 20 Nov 2017 02:10 AM IST
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वाराणसी। साहित्यकार मनु शर्मा की रचनाएं देश की थाती हैं। हम सबके लिए वसीयत के रूप में वे अपनी कृतियां छोड़कर गए हैं। इस अमूल्य विरासत को सहेजने और आगे बढ़ाने की जरूरत है। रविवार को मनु शर्मा की याद में महात्मा काशी विद्यापीठ के गांधी अध्ययन पीठ सभागार में आयोजित ‘स्मृति संध्या’ में ये बातें केंद्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने कहीं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मनु शर्मा ने धारा के विपरीत चलकर जगह बनाई और सार्थक जीवन जीया। उनकी सात सौ कविताएं, 300 कहानियां और 20 से अधिक उपन्यास वसीयत के रूप में हमारे बीच हैं। उनकी यादें परिवार के साथ देश में भी गुंजायमान रहेंगी। पद्मभूषण पंडित साजन मिश्र ने कहा कि उनकी यादें अविस्मरणीय हैं। उनकी साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने की जरूरत है। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव मोहन प्रकाश ने कहा कि उनकी हर एक मुस्कान का अलग मतलब होता था। उनके जाने से कबीरचौरा सूना हो गया। उन्होंने उनके बेटे हेमंत शर्मा से इस थाती को आगे बढ़ाने का आग्रह किया। वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र कुमार ने कहा कि मनु जी सरल स्वभाव के थे। उनकी सहजता के सभी कायल थे। इस अवसर पर उनकी पुस्तक ‘फेरीवाला रचनाकार’ का विमोचन किया गया। साथ ही 30 मिनटी की डाक्यूमेंट्री ‘महायुद्ध के सारथी मनु शर्मा’ प्रदर्शित की गई, जिसमें उनके भाषण से लेकर जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को दिखाया गया।
इस मौके पर केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल, प्रदेश के विधि न्याय मंत्री बृजेश पाठक, विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय, आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास, वरिष्ठ पत्रकार राम बहाुदर राय, पूर्व मंत्री नारद राय, विधायक डॉ. अवधेश सिंह, जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र, आनंद मोहन गुड्डू, वीणा पांडेय, उस्ताद मुस्तफा खां, डॉ. सुमन ओझा, डॉ. केपी यादव, वीणा पांडेय और आरके चौधरी आदि ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। संचालन आलोक श्रीवास्तव ने किया।
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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मनु शर्मा ने धारा के विपरीत चलकर जगह बनाई और सार्थक जीवन जीया। उनकी सात सौ कविताएं, 300 कहानियां और 20 से अधिक उपन्यास वसीयत के रूप में हमारे बीच हैं। उनकी यादें परिवार के साथ देश में भी गुंजायमान रहेंगी। पद्मभूषण पंडित साजन मिश्र ने कहा कि उनकी यादें अविस्मरणीय हैं। उनकी साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने की जरूरत है। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव मोहन प्रकाश ने कहा कि उनकी हर एक मुस्कान का अलग मतलब होता था। उनके जाने से कबीरचौरा सूना हो गया। उन्होंने उनके बेटे हेमंत शर्मा से इस थाती को आगे बढ़ाने का आग्रह किया। वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र कुमार ने कहा कि मनु जी सरल स्वभाव के थे। उनकी सहजता के सभी कायल थे। इस अवसर पर उनकी पुस्तक ‘फेरीवाला रचनाकार’ का विमोचन किया गया। साथ ही 30 मिनटी की डाक्यूमेंट्री ‘महायुद्ध के सारथी मनु शर्मा’ प्रदर्शित की गई, जिसमें उनके भाषण से लेकर जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को दिखाया गया।
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इस मौके पर केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल, प्रदेश के विधि न्याय मंत्री बृजेश पाठक, विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय, आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास, वरिष्ठ पत्रकार राम बहाुदर राय, पूर्व मंत्री नारद राय, विधायक डॉ. अवधेश सिंह, जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र, आनंद मोहन गुड्डू, वीणा पांडेय, उस्ताद मुस्तफा खां, डॉ. सुमन ओझा, डॉ. केपी यादव, वीणा पांडेय और आरके चौधरी आदि ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। संचालन आलोक श्रीवास्तव ने किया।
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