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नब्बे प्रतिशत गैर जरूरी मांगी जाती हैं सूचनाएं

Thu, 23 Apr 2015 02:08 AM IST
वाराण्ासी, ब्यूरो
वाराण्ासी, ब्यूरो Updated Thu, 23 Apr 2015 02:08 AM IST
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90 percent knowledge demand for innecessary

वाराणसी। आरटीआई के तहत 90 प्रतिशत सूचनाएं गैर जरूरी मांगी जाती हैं। जिस उददेश्य के लिए इस कानून को बनाया गया, इसका लाभ अभी तक पूरी तरह से जनता को नहीं मिल पा रही हैं।

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ये बातें प्रशासनिक सुधार विभाग लखनऊ के वरिष्ठ शोध अधिकारी डा. राहुल सिंह ने कहीं। बुधवार को कमिश्नरी में सूचना का अधिकार अधिनियम व जनहित गारंटी अधिनियम पर कार्यशाला के दौरान अधिकारियों से उनकी दिक्कतों के बारे में चर्चा की गई। मंडल स्तरीय कार्यशाला में वाराणसी के अलावा चंदौली, गाजीपुर और जौनपुर के अधिकारी शामिल रहे।
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लखनऊ के ही शोध अधिकारी डा. विपिन कुमार ने सूचना के अधिकार के तहत आने वाले आवेदनों का ठीक ढंग से जवाब देने की जानकारी दी। कहा कि आवेदक सूचना मांग सकता है लेकिन सवाल नहीं करेगा। इस दौरान बजट न होने पर जवाब देने में आने वाली समस्या को भी अधिकारियों ने रखा।
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 इसके बाबत शोध अधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से एक्ट में ही बजट का प्रावधान नहीं है। मसलन, आवेदक 10 रुपये देकर सूचना मांगता है। इसके बाद यदि सूचना जितने पेज में दी जाएगी उतने पेज का चार्ज 2 रुपये की दर से लिया जाता है। कार्यशाला में एसीएम तृतीय एसएन शुक्ल, जिलापूर्ति अधिकारी अशोक यादव समेत अन्य विभागों के अधिकारी शामिल थे।

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