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हिंदी जगत के शलाका पुरुष को दी श्रद्धांजलि
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वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय ने भारतीय ज्ञान परंपरा का जो निर्माण किया उसमें नामवर सिंह अन्यतम थे। उनके निर्माण में आचार्य केशव प्रसाद मिश्र, आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की भूमिका तो थी ही साथ ही उनके विशद अध्ययन मनन का भी योगदान था। परिस्थितियों के आगे कभी नहीं झुके और न ही कोई समझौता किया। अपने संघर्ष के दिनों को उन्होंने स्वाध्याय और चिंतन से भर दिया। उक्त विचार प्रो. अवधेश प्रधान ने व्यक्त किए। वह गुरुवार को बीएचयू में महिला महाविद्यालय की स्मृति सभा को संबोधित कर रहे थे।
सभा के दौरान हैदराबाद की प्रो. मणिम्यांबा मणि ने हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी की यादें साझा की। प्रो. सुशीला सिंह ने उनकी अडिगता को रेखांकित किया। प्रो. चंद्रकला त्रिपाठी ने संस्मरण सुनाए। प्रो. वशिष्ठ नारायण त्रिपाठी ने उन्हें विराट मेधा का महान व्यक्तित्व बताया। इस अवसर पर प्रो. मीनाक्षी सिंह, प्रो. ज्योत्सना श्रीवास्तव, प्रो. रिफत जमाल, प्रो. कनिका कुंडू, प्रो. लयलीना भट आदि ने भी विचार व्यक्त किए। सभा ने अंत में दो मिनट का मौन धारण कर नामवर सिंह को श्रद्धांजलि दी गई।
हिंदी साहित्य को उदय प्रताप कॉलेज ने अपना अमूल्यतम योगदान दिया है। नामवर सिंह ने हिन्दी साहित्य को समृद्ध ही नहीं किया वरन उसे प्रतिष्ठित भी किया। वो सरस्वती के सच्चे मानस पुत्र थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा उदय प्रताप कालेज से ही हुई थी। उनके निधन से पूरा विद्यालय परिवार एवं हिंदी जगत मर्माहत है। हम सभी उनको शत शत नमन करते हैं। उपरोक्त बातें उदय प्रताप इंटर कालेज के प्रधानाचार्य डा. रमेश प्रताप सिंह ने विद्यालय के सोमाया सभागार में अध्यापक एवं कर्मचारियों की शोक सभा में कही। इस दौरान उपप्रधानाचार्य प्रेमनारायण सिंह, डॉ. धीरेन्द्र सिंह, डॉ. अरविन्द कुमार सिंह, विवेकानन्द द्विवेदी, अरविन्द कुमार सिंह, डॉ. राघवेन्द्र प्रताप सिंह, डॉ. उमाकांत सिंह, रामानुज सिंह, डॉ. मंशा कुमारी, डॉ. विनय कुमार सिंह एवं समस्त कर्मचारी गण उपस्थित रहे।
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सभा के दौरान हैदराबाद की प्रो. मणिम्यांबा मणि ने हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी की यादें साझा की। प्रो. सुशीला सिंह ने उनकी अडिगता को रेखांकित किया। प्रो. चंद्रकला त्रिपाठी ने संस्मरण सुनाए। प्रो. वशिष्ठ नारायण त्रिपाठी ने उन्हें विराट मेधा का महान व्यक्तित्व बताया। इस अवसर पर प्रो. मीनाक्षी सिंह, प्रो. ज्योत्सना श्रीवास्तव, प्रो. रिफत जमाल, प्रो. कनिका कुंडू, प्रो. लयलीना भट आदि ने भी विचार व्यक्त किए। सभा ने अंत में दो मिनट का मौन धारण कर नामवर सिंह को श्रद्धांजलि दी गई।
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हिंदी साहित्य को उदय प्रताप कॉलेज ने अपना अमूल्यतम योगदान दिया है। नामवर सिंह ने हिन्दी साहित्य को समृद्ध ही नहीं किया वरन उसे प्रतिष्ठित भी किया। वो सरस्वती के सच्चे मानस पुत्र थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा उदय प्रताप कालेज से ही हुई थी। उनके निधन से पूरा विद्यालय परिवार एवं हिंदी जगत मर्माहत है। हम सभी उनको शत शत नमन करते हैं। उपरोक्त बातें उदय प्रताप इंटर कालेज के प्रधानाचार्य डा. रमेश प्रताप सिंह ने विद्यालय के सोमाया सभागार में अध्यापक एवं कर्मचारियों की शोक सभा में कही। इस दौरान उपप्रधानाचार्य प्रेमनारायण सिंह, डॉ. धीरेन्द्र सिंह, डॉ. अरविन्द कुमार सिंह, विवेकानन्द द्विवेदी, अरविन्द कुमार सिंह, डॉ. राघवेन्द्र प्रताप सिंह, डॉ. उमाकांत सिंह, रामानुज सिंह, डॉ. मंशा कुमारी, डॉ. विनय कुमार सिंह एवं समस्त कर्मचारी गण उपस्थित रहे।
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