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तेज झटके के साथ हुआ था धमाका
Updated Thu, 17 May 2018 02:16 AM IST
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वाराणसी। मंगलवार शाम को हुए हादसे के चश्मदीद और रोडवेज की क्षतिग्रस्त महानगर बस के चालक असरफूद्दीन को अभी भी मौत का मंजर सामने दिख रहा है। वह बात करते-करते सहम जाते हैं। उनके चेहरे का रंग बदलने लगता है।
किसी तरह खुद को संयत करते हुए उन्होंने बताया कि वह रोडवेज कार्र्यालय में पैसा जमा करने और बस में डीजल भराने जा रहा था। जाम के चलते गाडि़यां धीरे-धीरे निकल रही थीं। इसी बीच एक जोरदार झटका लगा और तेज धमाका हुआ। बस आगे से पूरी उठ गई। मैंने पीछे मुड़कर देखा तो कुछ देर के लिए मेरी सांसें रुक गईं। चारों ओर धूल का गुबार और चीख-पुकार सुनाई दे रही थी। बस के अंदर के जो लोग थे, वे भी बचाओ-बचाओ चिल्लाने लगे थे। जो लोग कंडक्टर सीट तक बैठे थे, वे घायल होे गए, जबकि पीछे बैठे लोग बैठे ही रह गए।
असरफूद्दीन याद करते हुए बताते हैं-बस का गेट भी जाम हो गया था। किसी तरह धक्का देकर खोला गया। इतने में जो लोग सक्षम थे, वे गिरते-पड़े निकल गए। घायल लोग अपनी जान की भीख मांग रहे थे। कुछ देर के बाद मैं लोगों की सहायता करने में जुट गया और पांच लोगों को बाहर निकाला। वहीं हादसे के समय बस में मौजूद परिचालक हेमंत का फोन बंद कर दिया गया है।
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किसी तरह खुद को संयत करते हुए उन्होंने बताया कि वह रोडवेज कार्र्यालय में पैसा जमा करने और बस में डीजल भराने जा रहा था। जाम के चलते गाडि़यां धीरे-धीरे निकल रही थीं। इसी बीच एक जोरदार झटका लगा और तेज धमाका हुआ। बस आगे से पूरी उठ गई। मैंने पीछे मुड़कर देखा तो कुछ देर के लिए मेरी सांसें रुक गईं। चारों ओर धूल का गुबार और चीख-पुकार सुनाई दे रही थी। बस के अंदर के जो लोग थे, वे भी बचाओ-बचाओ चिल्लाने लगे थे। जो लोग कंडक्टर सीट तक बैठे थे, वे घायल होे गए, जबकि पीछे बैठे लोग बैठे ही रह गए।
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असरफूद्दीन याद करते हुए बताते हैं-बस का गेट भी जाम हो गया था। किसी तरह धक्का देकर खोला गया। इतने में जो लोग सक्षम थे, वे गिरते-पड़े निकल गए। घायल लोग अपनी जान की भीख मांग रहे थे। कुछ देर के बाद मैं लोगों की सहायता करने में जुट गया और पांच लोगों को बाहर निकाला। वहीं हादसे के समय बस में मौजूद परिचालक हेमंत का फोन बंद कर दिया गया है।
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