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जुलूस निकाल डीएम दफ्तर धमकीं आशाएं
Updated Wed, 02 May 2018 12:48 AM IST
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ज्ञानपुर। तीन सूत्री मांगों को लेकर जिले की आशा कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को जुलूस की शक्ल में नगर भ्रमण करने के बाद डीएम कार्यालय पहुंचीं। जो सरकार निकम्मी है, वह सरकार बदलनी है..., आशा की मजबूरी है, वेतन बहुत जरूरी है... आदि नारों के साथ आशा कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकाला। इसके बाद मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी आशा संघ के बैनर तले विभिन्न ब्लॉकों से आशाएं मंगलवार को सुबह जिला अस्पताल परिसर में जुटीं। यहां से जुलूस निकालते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पर पहुंचीं। संगठन की जिलाध्यक्ष साजिदा बेगम ने कहा कि वर्ष 2007 से वे हर राष्ट्रीय सेवा में बिना मानदेय, बिना वेतन योगदान दे रहीं हैं। चुनाव के समय सभी राजनीतिक दलों ने आशाओं को आश्वस्त किया था कि सरकार बनने पर उनकी समस्याएं सुनी जाएंगी, लेकिन सरकार बनने पर उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है। 2014 में भाजपा ने भी बेहतर मानदेय एवं तमाम सुविधाएं देने की बात कही थी, लेकिन अब तक ध्यान नहीं दिया गया। कई बार इसको लेकर जंतर-मंतर पर आंदोलन किया गया। मगर हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। आशाओं की तीन मांगों में ग्रामीण इलाकों में जोखिम भरे कार्य को देखते हुए राज्य कर्मचारी घोषित करने या 15 हजार मानदेय, उनके आश्रितों को सेवायोजित करने और सभी जिलों में आशा संघ को एक कार्यालय आवंटित करने की मांग शामिल है। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देगी तो 2019 चुनाव में वह भाजपा को सबक सिखाएंगी। इस मौके पर गीता देवी, विजेता सिंह, गिरजा देवी आदि रहीं।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी आशा संघ के बैनर तले विभिन्न ब्लॉकों से आशाएं मंगलवार को सुबह जिला अस्पताल परिसर में जुटीं। यहां से जुलूस निकालते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पर पहुंचीं। संगठन की जिलाध्यक्ष साजिदा बेगम ने कहा कि वर्ष 2007 से वे हर राष्ट्रीय सेवा में बिना मानदेय, बिना वेतन योगदान दे रहीं हैं। चुनाव के समय सभी राजनीतिक दलों ने आशाओं को आश्वस्त किया था कि सरकार बनने पर उनकी समस्याएं सुनी जाएंगी, लेकिन सरकार बनने पर उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है। 2014 में भाजपा ने भी बेहतर मानदेय एवं तमाम सुविधाएं देने की बात कही थी, लेकिन अब तक ध्यान नहीं दिया गया। कई बार इसको लेकर जंतर-मंतर पर आंदोलन किया गया। मगर हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। आशाओं की तीन मांगों में ग्रामीण इलाकों में जोखिम भरे कार्य को देखते हुए राज्य कर्मचारी घोषित करने या 15 हजार मानदेय, उनके आश्रितों को सेवायोजित करने और सभी जिलों में आशा संघ को एक कार्यालय आवंटित करने की मांग शामिल है। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देगी तो 2019 चुनाव में वह भाजपा को सबक सिखाएंगी। इस मौके पर गीता देवी, विजेता सिंह, गिरजा देवी आदि रहीं।
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