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पंडालों में महाकाली की प्रतिष्ठापना, गूंजे जयकारे
Updated Thu, 19 Oct 2017 01:47 AM IST
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वाराणसी। मां काली की नयनाभिराम प्रतिमाएं बुधवार की रात पंडालों में प्रतिष्ठापित कर दी गईं। सविधि मंत्रोच्चार के साथ मां काली की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। दीपावली की रात कालरात्रि में महानिशा पूजा होगी। सोनारपुरा के वाणी संघ, भेलूपुर के शारदोत्सव संघ समेत कई स्थानों पर मां काली की प्रतिमाएं प्रतिष्ठापित कर दी गईं। गुरुवार को दीपोत्सव के साथ ही मां काली की झांकियों के दर्शन आरंभ हो जाएंगे।
देवनाथपुरा स्थित नवसंघ के सुसज्जित पंडाल में मां काली की प्रतिमा की प्रतिष्ठापना बुधवार की रात 8:33 बजे पं. देवाशीष मुखर्जी ने कराई। 19 अक्तूबर की अमावस्या की रात तांत्रिक विधि से महानिशा पूजा होगी। 20 अक्तूबर को भंडारा और 21 अक्तूबर को धुनुचि, ढाक नृत्य प्रतियोगिताएं होंगी। 22 अक्तूबर की शाम 301 महिलाओं को वस्त्र वितरित किया जाएगा।
नवसंघ इस बार गोल्डेन जुबली वर्ष मनाया जा रहा है। देवनाथपुरा में नवसंघ के पंडाल में यह शहर की सबसे बड़ी 24 फीट ऊंची मां काली की प्रतिमा प्रतिष्ठापित की गई है। इसके अलावा सोनारपुरा में वाणी संघ, भेलूपुरा में शारदोत्सव संघ और गिरजाघर के पास भी मां काली की प्रतिमाओं की प्रतिष्ठापना पंडालों में की जाएगी। उल्लेखनीय है कि 1991 में इसी प्रतिमा के विसर्जन के दौरान दो संप्रदायों के बीच हुए बवाल में 28 लोगों की जान चली गई थी। इस बार भी देनाथपुरा की काली प्रतिमा को लेकर प्रशासन सतर्क है।
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देवनाथपुरा स्थित नवसंघ के सुसज्जित पंडाल में मां काली की प्रतिमा की प्रतिष्ठापना बुधवार की रात 8:33 बजे पं. देवाशीष मुखर्जी ने कराई। 19 अक्तूबर की अमावस्या की रात तांत्रिक विधि से महानिशा पूजा होगी। 20 अक्तूबर को भंडारा और 21 अक्तूबर को धुनुचि, ढाक नृत्य प्रतियोगिताएं होंगी। 22 अक्तूबर की शाम 301 महिलाओं को वस्त्र वितरित किया जाएगा।
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नवसंघ इस बार गोल्डेन जुबली वर्ष मनाया जा रहा है। देवनाथपुरा में नवसंघ के पंडाल में यह शहर की सबसे बड़ी 24 फीट ऊंची मां काली की प्रतिमा प्रतिष्ठापित की गई है। इसके अलावा सोनारपुरा में वाणी संघ, भेलूपुरा में शारदोत्सव संघ और गिरजाघर के पास भी मां काली की प्रतिमाओं की प्रतिष्ठापना पंडालों में की जाएगी। उल्लेखनीय है कि 1991 में इसी प्रतिमा के विसर्जन के दौरान दो संप्रदायों के बीच हुए बवाल में 28 लोगों की जान चली गई थी। इस बार भी देनाथपुरा की काली प्रतिमा को लेकर प्रशासन सतर्क है।
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