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अब बीमा ग्राहकों को देनी पड़ेगी अधिक किश्त
Updated Tue, 20 Jun 2017 01:07 AM IST
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वाराणसी। जीएसटी लागू होने के बाद आम लोगों के बजट पर भी असर पड़ेगा। बैंकिंग, इंश्योरेंस, रियल इस्टेट, म्यूचुअल फंड्स इन्वेस्टमेंट पर 15 फीसदी टैक्स है। जीएसटी लागू होने के बाद यह 18 फीसदी हो जाएगा।
प्रमुख रूप से तीन तरह के इंश्योरेंस होते हैं। इसमें टर्म इंश्योरेंस प्लांस, यूलिप और भविष्य निधि (मनी बैक समेत)। मौजूदा व्यवस्था में इन तीनों पर टैक्स की अलग-अलग दरें हैं। लाइफ इंश्योरेंस पालिसी की प्रीमियम दो हिस्सों में अदा की जाती है, रिस्क कवरेज और सेविंग्स। रिस्क कवरेज वाले हिस्से पर सर्विस टैक्स लगता है जबकि सेविंग्स में छूट है।
बीमा धारक की इच्छा के मुताबिक ग्रॉस प्रीमियम में से इन्वेस्टमेंट या सेविंग्स के हिस्से को कम किया जाएगा। उस पर ही जीएसटी लागू होगा। साल में एक बार जमा किए जाने वाले बीमा प्रीमियम पर 10 फीसदी चार्ज होगा। अन्य सभी मामलों में पहले साल में प्रीमियम के 25 फीसदी और बाद के सालों में 12.5 फीसदी पर जीएसटी लागू होगा। इस प्रकार यदि अक्षय निधि योजना का प्रीमियम 100 रुपये आता है तो पहले उसके 25 फीसदी यानी 25 रुपये पर 18 फीसदी जीएसटी लागू होगा।
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यदि बीमाधारक की ओर से प्रीमियम की पूरी राशि रिस्क कवर के लिए ही चुकाई जाती है तो पूरे प्रीमियम पर 18 फीसद जीएसटी लागू होगा। बीमाधारक को अधिक राशि अदा करनी होगी। बीमाधारक को ऐसी स्थिति में ही लाभ हो सकता है जब कंपनियां इनपुट टैक्स क्त्रस्ेडिट (आइटीसी) के फायदे उन्हें लौटा दें।
जीएसटी व्यवस्था के तहत सरकार ने वित्तीय सेवाओं को 18 फीसद के टैक्स स्लैब में रखा है। इन सेवाओं पर अब तक 15 प्रतिशत टैक्स ही लगता था। अब इसमें तीन प्रतिशत वृद्धि का मतलब है कि ग्राहक को प्रति 100 रुपये के बैंक चार्ज पर तीन रुपये अधिक चुकाना होगा। मालूम हो कि हाल ही में एसबीआई ने कैश विड्रॉल समेत तमाम सेवाओं पर चार्ज बढ़ा दिया हैं।
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प्रमुख रूप से तीन तरह के इंश्योरेंस होते हैं। इसमें टर्म इंश्योरेंस प्लांस, यूलिप और भविष्य निधि (मनी बैक समेत)। मौजूदा व्यवस्था में इन तीनों पर टैक्स की अलग-अलग दरें हैं। लाइफ इंश्योरेंस पालिसी की प्रीमियम दो हिस्सों में अदा की जाती है, रिस्क कवरेज और सेविंग्स। रिस्क कवरेज वाले हिस्से पर सर्विस टैक्स लगता है जबकि सेविंग्स में छूट है।
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बीमा धारक की इच्छा के मुताबिक ग्रॉस प्रीमियम में से इन्वेस्टमेंट या सेविंग्स के हिस्से को कम किया जाएगा। उस पर ही जीएसटी लागू होगा। साल में एक बार जमा किए जाने वाले बीमा प्रीमियम पर 10 फीसदी चार्ज होगा। अन्य सभी मामलों में पहले साल में प्रीमियम के 25 फीसदी और बाद के सालों में 12.5 फीसदी पर जीएसटी लागू होगा। इस प्रकार यदि अक्षय निधि योजना का प्रीमियम 100 रुपये आता है तो पहले उसके 25 फीसदी यानी 25 रुपये पर 18 फीसदी जीएसटी लागू होगा।
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यदि बीमाधारक की ओर से प्रीमियम की पूरी राशि रिस्क कवर के लिए ही चुकाई जाती है तो पूरे प्रीमियम पर 18 फीसद जीएसटी लागू होगा। बीमाधारक को अधिक राशि अदा करनी होगी। बीमाधारक को ऐसी स्थिति में ही लाभ हो सकता है जब कंपनियां इनपुट टैक्स क्त्रस्ेडिट (आइटीसी) के फायदे उन्हें लौटा दें।
जीएसटी व्यवस्था के तहत सरकार ने वित्तीय सेवाओं को 18 फीसद के टैक्स स्लैब में रखा है। इन सेवाओं पर अब तक 15 प्रतिशत टैक्स ही लगता था। अब इसमें तीन प्रतिशत वृद्धि का मतलब है कि ग्राहक को प्रति 100 रुपये के बैंक चार्ज पर तीन रुपये अधिक चुकाना होगा। मालूम हो कि हाल ही में एसबीआई ने कैश विड्रॉल समेत तमाम सेवाओं पर चार्ज बढ़ा दिया हैं।