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जो ये दीवार का सुराख है साजिश का हिस्सा है
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वाराणसी। आईआईटी बीएचयू में सांस्कृतिक उत्सव काशीयात्रा के पहले दिन काव्यमंजरी में जाने माने शायर राहत इंदौरी सहित कई नामचीन शायरों ने आईआईटीयंस पर अमिट छाप छोड़ी। अपनी शायरी से जहां सबको गुदगुदाया वहीं समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करने के लिए युवाओं से आगे आने का आह्वान किया।
शाम को आयोजित काव्यमंजरी में युवाओं का उत्साह देखने लायक था। स्वतंत्रता भवन का पूरा सभागार खचाखच भरा था। हालत यह रही कि नीचे और बाल्कनी की सभी सीट भरने के बाद जिसको जहां जगह मिली, वहीं खड़े होकर राहत इंदौरी और अन्य शायरों को सुनता रहा। राहत इंदौरी ने ‘हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं, मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं। जो ये दीवार का सुराख है, साजिश का हिस्सा है। मगर हम इसको अपने घर का रोशनदान कहते हैं। फिर उसके बाद चाहे ये जुबा क टती है कट जाए, हमे जो कुछ भी कहना है अलल-एलान कहते हैं’। अगली कड़ी में राहत इंदौरी ने ‘राज जो कुछ हो इशारों में बता भी देना, हाथ जबसे मिलाना तो दबा भी देना’। इसके माध्यम से युवाओं के चंचल मन को गुदगुदाया। रुपेश सक्सेना ने अपनी शायरी ‘वजन ज्यादा है ताकत का उठाकर ही रहेंगे हम, जो कहा कर दिया तुमसे निभाकर ही रहेंगे हम। हमे तुमसे मोहब्बत है, तुम्हे हमसे मोहब्बत है। मोहब्बत किसे कहते हैं बताकर रहेंगे’। जैसे ही सुनाई पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। गौरी मिश्रा ने ‘बीमारी इश्क में दिल की दवा के साथ आयी हूं मोहब्बत की अनोखी सी अदा के साथ आयी हूं। महकने लग गई बनारस की हर गली, क्योंकि मैं नैनीताल की ताजी हवा के साथ आयी हूं’। शायरी के माध्यम से वाहवाही लूटी। युवा कवि दमदार बनारसी ने ‘उसे पाने की ख्वाहिश जिहादियों की तरह, मुहब्बत है मेरी मुकाम आंधियों की तरह। है मेरी जान तो कश्मीर की कली जैसी, उसके भाई है सब अलगाववादियों की तरह।’
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शाम को आयोजित काव्यमंजरी में युवाओं का उत्साह देखने लायक था। स्वतंत्रता भवन का पूरा सभागार खचाखच भरा था। हालत यह रही कि नीचे और बाल्कनी की सभी सीट भरने के बाद जिसको जहां जगह मिली, वहीं खड़े होकर राहत इंदौरी और अन्य शायरों को सुनता रहा। राहत इंदौरी ने ‘हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं, मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं। जो ये दीवार का सुराख है, साजिश का हिस्सा है। मगर हम इसको अपने घर का रोशनदान कहते हैं। फिर उसके बाद चाहे ये जुबा क टती है कट जाए, हमे जो कुछ भी कहना है अलल-एलान कहते हैं’। अगली कड़ी में राहत इंदौरी ने ‘राज जो कुछ हो इशारों में बता भी देना, हाथ जबसे मिलाना तो दबा भी देना’। इसके माध्यम से युवाओं के चंचल मन को गुदगुदाया। रुपेश सक्सेना ने अपनी शायरी ‘वजन ज्यादा है ताकत का उठाकर ही रहेंगे हम, जो कहा कर दिया तुमसे निभाकर ही रहेंगे हम। हमे तुमसे मोहब्बत है, तुम्हे हमसे मोहब्बत है। मोहब्बत किसे कहते हैं बताकर रहेंगे’। जैसे ही सुनाई पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। गौरी मिश्रा ने ‘बीमारी इश्क में दिल की दवा के साथ आयी हूं मोहब्बत की अनोखी सी अदा के साथ आयी हूं। महकने लग गई बनारस की हर गली, क्योंकि मैं नैनीताल की ताजी हवा के साथ आयी हूं’। शायरी के माध्यम से वाहवाही लूटी। युवा कवि दमदार बनारसी ने ‘उसे पाने की ख्वाहिश जिहादियों की तरह, मुहब्बत है मेरी मुकाम आंधियों की तरह। है मेरी जान तो कश्मीर की कली जैसी, उसके भाई है सब अलगाववादियों की तरह।’
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