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पूर्वांचल में गठबंधन की नब्ज टटोलेंगे अमित शाह
Updated Mon, 02 Jul 2018 02:56 AM IST
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वाराणसी। सपा-बसपा के गठबंधन के कारण 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए वाराणसी एक बार फिर अहम केंद्र बनने जा रहा है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का चार जुलाई का दौरा पूर्वांचल की चुनावी रणनीति में पटेल और राजभर बिरादरी को साधने से जोड़कर देखा जा रहा है। इस दौरान वाराणसी में आईटी सेल को भी सक्रिय किया जाएगा, ताकि केंद्र सरकार की योजनाओं के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ ही विरोधियों के जुबानी हमलों का बखूबी जवाब दिया जा सके।
जानकारों की मानें तो इस दौरे में शाह पूर्वांचल के मतदाताओं के भाव समझकर उसके मुताबिक पार्टी को रणनीति तैयार करने की सलाह देंगे। पार्टी को पता है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी, मिर्जापुर और आजमगढ़ मंडल में बसपा ने सीट भले ही नहीं जीती थी, पर उसके प्रत्याशियों को सपा से भी ज्यादा वोट मिले थे। ऐसे में गठबंधन के बाद हालात बहुत अनुकूल नहीं हैं। मुलायम सिंह यादव द्वारा आजमगढ़ सीट छोड़ने के बाद भाजपा ने यहां अपनी नजर गड़ा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आजमगढ़ दौरा इसी मकसद से कराया जा रहा है।
चार जुलाई के दौरे में यह भी तय हो जाएगा कि मंत्रिमंडल के अगले विस्तार में पूर्वांचल को कैसे महत्व दिया जाए। जमीनी हकीकत की पड़ताल और फीडबैक के बाद मंथन कर तालमेल बढ़ाने पर फैसला किया जाएगा। गोरखपुर-बस्ती मंडल की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी गई है, जबकि वाराणसी और मिर्जापुर की कमान फिलहाल अमित शाह ने खुद संभाल ली है। सूत्र तो यह भी कहते हैं कि चुनाव से पहले तक पीएम मोदी और शाह के पूर्वांचल दौरों की संख्या बढ़ाई जाएगी, ताकि पार्टी 2017 के विधानसभा चुनाव जैसा परचम 2019 के लोकसभा चुनाव में भी फहरा सके।
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जानकारों की मानें तो इस दौरे में शाह पूर्वांचल के मतदाताओं के भाव समझकर उसके मुताबिक पार्टी को रणनीति तैयार करने की सलाह देंगे। पार्टी को पता है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी, मिर्जापुर और आजमगढ़ मंडल में बसपा ने सीट भले ही नहीं जीती थी, पर उसके प्रत्याशियों को सपा से भी ज्यादा वोट मिले थे। ऐसे में गठबंधन के बाद हालात बहुत अनुकूल नहीं हैं। मुलायम सिंह यादव द्वारा आजमगढ़ सीट छोड़ने के बाद भाजपा ने यहां अपनी नजर गड़ा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आजमगढ़ दौरा इसी मकसद से कराया जा रहा है।
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चार जुलाई के दौरे में यह भी तय हो जाएगा कि मंत्रिमंडल के अगले विस्तार में पूर्वांचल को कैसे महत्व दिया जाए। जमीनी हकीकत की पड़ताल और फीडबैक के बाद मंथन कर तालमेल बढ़ाने पर फैसला किया जाएगा। गोरखपुर-बस्ती मंडल की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी गई है, जबकि वाराणसी और मिर्जापुर की कमान फिलहाल अमित शाह ने खुद संभाल ली है। सूत्र तो यह भी कहते हैं कि चुनाव से पहले तक पीएम मोदी और शाह के पूर्वांचल दौरों की संख्या बढ़ाई जाएगी, ताकि पार्टी 2017 के विधानसभा चुनाव जैसा परचम 2019 के लोकसभा चुनाव में भी फहरा सके।
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