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धारा मोड़ कर नदी की तलहटी कब्जाने की थी साजिश
Updated Fri, 29 Dec 2017 02:13 AM IST
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वाराणसी। अस्तित्व से जूझ रही वरुणा को बचाने के लिए एक तरफ नदी विशेषज्ञों से लेकर शासन तक चिंता फैली है, वहीं दूसरी तरफ मलबे की आड़ में तलहटी कब्जाने की साजिश का एक और खुलासा हुआ है। यह साजिश कॉरिडोर से जुड़े अधिकारियों की मिलीभगत के जरिए वरुणा की धारा मोड़ कर तलहटी कब्जाने की थी। इसके लिए गुपचुप तरीके से बाकायदा सीमेंटेड पिलर के जरिए एक तरह से बुनियादी भरी जा चुकी थी और मलबे से उसे पाट दिया गया था। धारा मोड़ने के लिए नदी में मिट्टी पाटने का सिलसिला भी शुरू हो गया था लेकिन ‘अमर उजाला’ में इसकी खबर प्रकाशित होने के बाद कार्यदायी संस्थाओं ने कदम खींच लिए और धारा पूर्ववत करने के लिए जब होटलों के पाटे गए मलबे की खुदाई शुरू कराई तो मलबे में सीमेंटेड पिलर सामने आने लगे।
मुख्यमंत्री की सख्ती के बावजूद एक तरफ जहां अवैध निर्माणों पर कार्रवाई मेें देरी हो रही है वहीं दूसरी तरफ वरुणा के अस्तित्व से खिलवाड़ की साजिशें भी थम नहीं रही हैं। कुछ जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मिलीभगत से शासन की आंखों में धूल झोंकने की कोशिशें हो रही हैं। यदि धारा मोड़े जाने का मामला प्रकाशित नहीं होता तो गुपचुप तरीके से तलहटी कब्जाने की साजिश अंजाम तक पहुंच गई होती और जिम्मेदार अनजान बने बैठे रह जाते। तलहटी कब्जाने के इस खुलासे से नदी विशेषज्ञ भी हैरान हैं। उनका कहना है कि जब तक ग्रीन बेल्ट से अवैध निर्माण नहीं हटाए जाते तब तक ऐसी साजिशें नहीं रुक पाएंगी। शासन-प्रशासन को सबसे पहले नदी के संरक्षण पर ध्यान देना चाहिए।
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मुख्यमंत्री की सख्ती के बावजूद एक तरफ जहां अवैध निर्माणों पर कार्रवाई मेें देरी हो रही है वहीं दूसरी तरफ वरुणा के अस्तित्व से खिलवाड़ की साजिशें भी थम नहीं रही हैं। कुछ जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मिलीभगत से शासन की आंखों में धूल झोंकने की कोशिशें हो रही हैं। यदि धारा मोड़े जाने का मामला प्रकाशित नहीं होता तो गुपचुप तरीके से तलहटी कब्जाने की साजिश अंजाम तक पहुंच गई होती और जिम्मेदार अनजान बने बैठे रह जाते। तलहटी कब्जाने के इस खुलासे से नदी विशेषज्ञ भी हैरान हैं। उनका कहना है कि जब तक ग्रीन बेल्ट से अवैध निर्माण नहीं हटाए जाते तब तक ऐसी साजिशें नहीं रुक पाएंगी। शासन-प्रशासन को सबसे पहले नदी के संरक्षण पर ध्यान देना चाहिए।
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