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कामनाओं के कुंड में आस्था की डुबकी
Updated Sun, 16 Sep 2018 01:56 AM IST
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वाराणसी। आस्था की नगरी काशी में लोलार्क कुंड भदैनी और क्रीं कुंड रविंद्रपुरी में शनिवार को करीब दो लाख श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। संतान प्राप्ति की कामना और कामना के पूर्ण होने पर पहुंचे श्रद्धालुओं की लाइनें शुक्रवार की रात से ही लग गई थीं। लोलार्क कुंड पर तो करीब सवा किमी लंबी लाइन लगी रही। स्नान का क्रम शनिवार की शाम तक चलता रहा। दोनों कुंडों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।
इस दिन संतान प्राप्ति की कामना और संतान प्राप्त होने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन कुंडों में स्नान करने पहुंचते हैं। इस निमित्त उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड के अलावा नेपाल से भी दंपती स्नान करने पहुंचे थे। स्नान के दौरान श्रद्धालुओं ने वस्त्र का त्याग करने के साथ ही फल का दान कर उसका एक वर्ष के लिए त्याग कर दिया। जिन महिलाओं को संतान प्राप्ति का सौभाग्य मिला था, वह अपने बच्चों के साथ पहुंचीं थीं और मुंडन संस्कार कराया।
हर बार कुंड में स्नान के दौरान भीड़भाड़ के बीच कई लोग गिर जाते थे। कुछ लोग बेहोश भी हो जाते थे। यही नहीं पिछले साल तो एक की मौत भी हो गई थी। इसको ध्यान में रखते हुए इस बार पुलिस प्रशासन ने प्रवेश और निकास अलग-अलग कर दिया गया था। इससे प्रवेश करने के बाद लोगों को दूसरे रास्ते से कुंड से बाहर निकाल दिया गया।
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भले कुंड में पानी भरा था लेकिन प्रचंड गर्मी ने कारण श्रद्धालुओं को परेशानियां हुईं। कई महिलाओं और बच्चों को गर्मी के चलते चक्कर आने लगा। बाद में स्थानीय लोगों ने उनको पानी पिलाया और छांव में बिठाया, तब जाकर उनको राहत मिली। लोगों ने बताया कि करीब पांच से छह महिलाएं गर्मी से बेहोश हुईं थीं।
मान्यता के अनुसार कुंडों में स्नान करने पर अपने पुराने कपड़ों को वहीं छोड़ दिया जाता है। देर शाम नगर निगम की टीम ने उन सभी वस्त्रों को एकत्रित कराकर उसे वहां से हटवाया। आयोजक दीपक मिश्रा, प्रकाश तिवारी, आनंद शर्मा ने बताया कि लोगों की ओर से छोड़े गए कपड़े चार ट्रक से भी अधिक हैं। इससे कुंड की सफाई का काम लगातार एक-दो दिन किया जाएगा।
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इस दिन संतान प्राप्ति की कामना और संतान प्राप्त होने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन कुंडों में स्नान करने पहुंचते हैं। इस निमित्त उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड के अलावा नेपाल से भी दंपती स्नान करने पहुंचे थे। स्नान के दौरान श्रद्धालुओं ने वस्त्र का त्याग करने के साथ ही फल का दान कर उसका एक वर्ष के लिए त्याग कर दिया। जिन महिलाओं को संतान प्राप्ति का सौभाग्य मिला था, वह अपने बच्चों के साथ पहुंचीं थीं और मुंडन संस्कार कराया।
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हर बार कुंड में स्नान के दौरान भीड़भाड़ के बीच कई लोग गिर जाते थे। कुछ लोग बेहोश भी हो जाते थे। यही नहीं पिछले साल तो एक की मौत भी हो गई थी। इसको ध्यान में रखते हुए इस बार पुलिस प्रशासन ने प्रवेश और निकास अलग-अलग कर दिया गया था। इससे प्रवेश करने के बाद लोगों को दूसरे रास्ते से कुंड से बाहर निकाल दिया गया।
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भले कुंड में पानी भरा था लेकिन प्रचंड गर्मी ने कारण श्रद्धालुओं को परेशानियां हुईं। कई महिलाओं और बच्चों को गर्मी के चलते चक्कर आने लगा। बाद में स्थानीय लोगों ने उनको पानी पिलाया और छांव में बिठाया, तब जाकर उनको राहत मिली। लोगों ने बताया कि करीब पांच से छह महिलाएं गर्मी से बेहोश हुईं थीं।
मान्यता के अनुसार कुंडों में स्नान करने पर अपने पुराने कपड़ों को वहीं छोड़ दिया जाता है। देर शाम नगर निगम की टीम ने उन सभी वस्त्रों को एकत्रित कराकर उसे वहां से हटवाया। आयोजक दीपक मिश्रा, प्रकाश तिवारी, आनंद शर्मा ने बताया कि लोगों की ओर से छोड़े गए कपड़े चार ट्रक से भी अधिक हैं। इससे कुंड की सफाई का काम लगातार एक-दो दिन किया जाएगा।