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संस्कृत में बेटियों की बढ़ती दखल शुभ संकेत : राज्यपाल

Mon, 25 Dec 2017 02:33 AM IST
Updated Mon, 25 Dec 2017 02:33 AM IST
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संस्कृत में बेटियों की बढ़ती दखल शुभ संकेत : राज्यपाल
वाराणसी। राज्यपाल और कुलाधिपति राम नाईक ने रविवार को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के 35वें दीक्षांत समारोह में 28394 मेधावियों को उपाधियां वितरित कीं। इसमें 13753 छात्र और 14641 छात्राएं शामिल थीं। साथ ही 37 स्नातकों को विभूतियों, संस्थानों के नाम पर 57 पदक दिए गए। इस आंकड़े को देखते हुए राज्यपाल ने कहा कि बेटियां संस्कृत की पढ़ाई में भी बेटों से आगे निकल गई हैं। यह देश के लिए शुभ संकेत हैं। इससे संस्कृत और परिवार दोनों का उन्नयन होगा। पारिवारिक बिखराव रुकेगा और एकजुटता आएगी।
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राम नाईक ने कहा कि देश में महिला सशक्तीकरण दिखने लगा है। अटल बिहारी वाजपेयी के सर्व शिक्षा अभियान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नारे से जोड़कर एक बड़े परिवर्तन की शुरूआत की है। उन्होंने प्रदेश में उच्च शिक्षा के स्तर में सुधार आने का दावा किया। साथ ही मेधावियों को दिए संदेश में कहा कि आज से आपके जीवन की असली लड़ाई शुरू होगी। इसलिए सतत प्रयास और कड़ी मेहनत जारी रखें तो हर क्षेत्र में सफलता मिलेगी।
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राज्यपाल 12:42 बजे दीक्षांत मंडप में पहुंचे। शिष्ट यात्रा में हिस्सा लेने के बाद कहा कि संस्कृत से ही संस्कृति का निर्माण होता है। लड़कियां जिस तरह से संस्कृत के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, वह बेहद सुखद है। उन्होंने कहा कि पहले महिलाएं शिक्षिका या नर्स ही बनना चाहती थीं, लेकिन अब जिस दफ्तर में जाइए, वहां महिलाएं जरूर दिखेंगी। महिलाएं सरहद की हिफाजत में भी हैं और पायलट भी। अब तो देश का रक्षा मंत्रालय भी महिला के हाथ में है। इसे उन्होंने बड़ा परिवर्तन बताया।
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राज्यपाल ने काशी में तीन विश्वविद्यालयों की स्थापना करने वाली तीन विभूतियों महामना मदन मोहन मालवीय, राष्ट्र रत्न शिव प्रसाद गुप्त और बाबू संपूर्णानंद को नमन किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत और योग के रिश्ते को सब जानते हैं। पीएम मोदी ने विश्व को भारतीय योग के महत्व से परिचित कराया और अब नतीजा सामने है। स्वागत भाषण कुलपति प्रो. यदुनाथ प्रसाद दुबे ने दिया। संचालन प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, मंगलाचरण सुनील कुमार चौधरी और धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव प्रभाष द्विवेदी ने किया।
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