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Varanasi News: चौकाघाट रामलीला मैदान की भूमि चिह्नित होने से 483 साल पुरानी रामलीला पर संकट
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एविलटेड रोड के कारण प्रभावित रामलीला की जमीन के बारे में जानकारी देते श्री चित्रकूट रामलीला समि
जिले में प्रस्तावित वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण को लेकर चौकाघाट स्थित ऐतिहासिक रामलीला मैदान की जमीन को अधिग्रहित किए जाने पर श्रीचित्रकूट रामलीला समिति काशी ने कड़ा विरोध जताया है। समिति के प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि मैदान का हिस्सा परियोजना की भेंट चढ़ गया तो सदियों पुरानी इस धार्मिक व सांस्कृतिक धरोहर के अस्तित्व पर सीधा खतरा मंडराने लगेगा।
पराड़कर भवन में बुधवार को समिति के मुकुंद उपाध्याय, मोहनकृष्ण अग्रवाल और रघुनाथ दास ने पत्रकारों को बताया कि हाल ही में प्रशासनिक टीम ने पैमाइश की है। इसमें मैदान के लगभग आठ मीटर के भू-भाग पर अधिग्रहण के निशान लगाए गए हैं। पदाधिकारियों ने ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि इस मैदान में अत्यंत प्राचीन काल से ही रामलीला मंचन के लिए पक्के सिंहासन बने हुए हैं। वर्ष 1883-84 के बंदोबस्ती (राजस्व) नक्शे में भी स्पष्ट रूप से रामलीला के तीन पक्के सिंहासनों का उल्लेख मिलता है।
समिति के अनुसार, मेघा भगत ने 483 साल पहले इस रामलीला की शुरुआत की थी। यह रामलीला काशी की सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न अंग है और तब से बिना किसी रुकावट के अनवरत आयोजित होती आ रही है। इस प्राचीन परंपरा को बचाने और संरक्षित करने के लिए समिति ने जन प्रतिनिधियों और शासन-प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील की है। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, वाराणसी के मेयर व स्थानीय जनप्रतिनिधियों को एक मांग पत्र (ज्ञापन) भेजकर निर्माण योजना में संशोधन करने की मांग की गई है।
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पराड़कर भवन में बुधवार को समिति के मुकुंद उपाध्याय, मोहनकृष्ण अग्रवाल और रघुनाथ दास ने पत्रकारों को बताया कि हाल ही में प्रशासनिक टीम ने पैमाइश की है। इसमें मैदान के लगभग आठ मीटर के भू-भाग पर अधिग्रहण के निशान लगाए गए हैं। पदाधिकारियों ने ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि इस मैदान में अत्यंत प्राचीन काल से ही रामलीला मंचन के लिए पक्के सिंहासन बने हुए हैं। वर्ष 1883-84 के बंदोबस्ती (राजस्व) नक्शे में भी स्पष्ट रूप से रामलीला के तीन पक्के सिंहासनों का उल्लेख मिलता है।
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समिति के अनुसार, मेघा भगत ने 483 साल पहले इस रामलीला की शुरुआत की थी। यह रामलीला काशी की सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न अंग है और तब से बिना किसी रुकावट के अनवरत आयोजित होती आ रही है। इस प्राचीन परंपरा को बचाने और संरक्षित करने के लिए समिति ने जन प्रतिनिधियों और शासन-प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील की है। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, वाराणसी के मेयर व स्थानीय जनप्रतिनिधियों को एक मांग पत्र (ज्ञापन) भेजकर निर्माण योजना में संशोधन करने की मांग की गई है।
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