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पति और तीन बच्चियों की मौत के बाद अनीता की हालत बेसुधों जैसी, सदमे में परिजन

Sat, 11 May 2019 01:59 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 11 May 2019 01:59 AM IST
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पति और तीन बच्चियों की मौत के बाद अनीता की हालत बेसुधों जैसी, सदमे में परिजन
वाराणसी। तीन मासूम बेटियों के साथ जहर खाकर जान देने वाले मिसिर पोखरा निवासी ठेला व्यवसायी दीपक कुमार गुप्ता उर्फ लड्डू के मिसिर पोखरा स्थित घर में शुक्रवार को सन्नाटा पसरा दिखा। इस बीच दीपक की पत्नी अनीता और मां लालमणी देवी के आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। बेसुध अनीता बार-बार यही कह रही थी कि अब उसका क्या होगा और वो किसके सहारे जिंदगी गुजारेगी। परिवार और मुहल्ले की महिलाएं अनीता और उसकी सास को ढांढस बंधाने की कोशिश कर रही थी लेकिन उनका बिलखना देख सभी की हिम्मत जवाब दे जा रही थी।
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आईपीएल में सट्टा लगाने व जुआ खेलने के कारण कर्ज में डूबे होने और पारिवारिक कलह से आजिज आकर ठेला व्यवसायी दीपक ने गुरुवार की भोर तीन मासूम बेटियों के साथ जहर खाकर जान दे दी थी। इस हृदयविदारक घटना के बाद दीपक की पत्नी और मां के साथ ही उसके भाई राजा, राजेश और भंटू में गहरे सदमे में हैं। परिवार के बच्चे बड़ों से पूछ रहे थे कि आस्था उर्फ नव्या, मान्या उर्फ अदिति और रिया कहां हैं। चाचा ने क्यों जहर खाया और सबको खिलाया। घर के बच्चों का जवाब बड़ों से देते नहीं बन रहा था। घटना से मुहल्ले के लोग भी खासे दुखी हैं। वहीं, शुक्रवार को दीपक के घर प्रदेश के राज्यमंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी पहुंचे और शोक में डूबे परिवार को ढांढस बंधाते हुए हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। उधर, घटना के दूसरे दिन भी दीपक और उसकी तीन बेटियों की मौत मिसिर पोखरा और आसपास के मुहल्लों में चर्चा का विषय बनी रही।
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लक्सा पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दीपक की पत्नी अनीता बीसी में पैसा लगाती थी। बीसी का 10 हजार रुपये दीपक ने खर्च कर दिया था और अनीता जब भी उससे पूछती थी तो कहता था कि जुए में हार गया। इसे लेकर अनीता से उसका विवाद चल रहा था। सीओ दशाश्वमेध प्रीति त्रिपाठी ने बताया कि दीपक की पत्नी और मां अभी इस स्थिति में नहीं हैं कि वो कुछ बता सकें या उनसे कुछ पूछा जा सके। दोनों से बातचीत कर दीपक के आत्मघाती कदम की वजह स्पष्ट की जाएगी।
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दीपक की आर्थिक स्थिति कई महीनों से डगमगाई थी। फीस न जमा होने के कारण उसकी बेटियों का स्कूल जाना बंद हो गया था। उधर, दीपक की मां लालमणी देवी ने बताया कि हमारे पास बेटे की अंत्येष्टि के लिए भी पैसे नहीं थे। नेता घर तो आ रहे हैं लेकिन उनका मदद का वादा सिर्फ बातोें तक ही सीमित है। वहीं, दीपक को कर्ज देने वाले भी चुप्पी साधे हुए हैं। मुहल्ले के लोगों ने बताया कि आए दिन कोई न कोई दीपक से तगादा करते हुए दिखाई दे जाता था लेकिन उसकी आत्महत्या के बाद उसके घर के आसपास कोई दिखाई नहीं दिया।
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