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दुबई और यूएस के पांच बुकी के संपर्क में थे सटोरिए
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वाराणसी। कानपुर और वाराणसी से पकड़े गए सटोरिये दुबई व यूएस केपांच बुकी के संपर्क में थे। गिरोह का सरगना जितेंद्र शिवहरे उर्फ जीतू केमोबाइल फोन और लैपटॉप से इसका खुलासा हुआ है। मौके से बरामद चार रजिस्टरों में शहर समेत अलग-अलग शहरों के कई बड़े लोगों केनाम भी लिखे हुए हैं। निमें कारोबारी, वकील, डॉक्टर भी हैं। एसटीएफ ने इनकेबारे में सटोरियों से पूछताछ कर जानकारी जुटाई है। टीमें लगाकर इन नामों का सत्यापन कराया जाएगा।
दस साल से अधिक समय तक दुबई में रहकर जितेंद्र ने ऑनलाइन सट्टेबाजी का रैकेट खड़ा किया था। वहीं यूएस जाकर कई बड़े बुकी केसाथ भी काम किया था। सूत्रों केमुताबिक सटोरियों केपास से जो दस्तावेज बरामद हुए हैं, उसमें दुबई व यूएस केपांच बुकी केनाम शामिल हैं। कानपुर व वाराणसी समेत अन्य राज्यों में बैठकर इन बुकी केसहारे वह विदेश में सट्टेबाजी का खेल चला रहा था। लखनऊ एसटीएफ के सीओ प्रमेश शुक्ला ने बताया कि चारों रजिस्टरों में सट्टेबाजी का लेखा जोखा लिखा हुआ है। बुकी केनाम, बेटिंग की रकम, किससे कितना लेनदेन है आदि। सट्टा खेलने के दौरान जो फौरी तौर पर जानकारी एक दूसरे से सटोरिए लेते थे वो भी इन्हीं रजिस्टरों में लिखी जाती थी।
सटोरिए लंदन केएप ऑरेंज केजरिए पूरा रैकेट चला रहे थे। जानकारों के मुताबिक इस एप केजरिए जो लोग जुड़ते थे, उनकेबारे में सट्टा खिलाने वालों को पूरी जानकारी रहती थी। इससे किसी भी तरह की धोखाधड़ी का खतरा नहीं रहता था। सट्टे की वेबसाइट की अपेक्षा एप पर सट्टा खेलना काफी सुरक्षित है। इसलिए ये सटोरिए एप का इस्तेमाल करते थे।
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एसटीएफ के मुताबिक मौके से जो साक्ष्य मिले हैं उससे पता चला है कि कम से कम एक पेटी की बेटिंग लगाई जाती थी। अधिकतम 50 पेटी की बेट लगाई गई। हालांकि एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि जो लेखा जोखा बरामद हुआ वह एक से दो दिन का है, इसलिए पूरी संभावना है कि करोड़ों में भी लगाई जाती होगी।
पर्ची और लॉटरी से सट्टा अब गुजरे जमाने की बात हो गई है। अब घर बैठे मोबाइल पर लाखों- करोड़ों का सट्टा चल रहा है। कोई एप केजरिए तो कोई अलग-अलग वेबसाइट पर सट्टा खेल रहे हैं। हर साल आईपीएल केवक्त ऑनलाइन सट्टा बाजार अधिक गर्म हो जाता है। जानकारों के मुताबिक सैकड़ों ऐसी वेबसाइट पर जहां पर हर वक्त किसी न किसी खेल पर या अन्य गतिविधियों पर सट्टा चलता रहा है। उससे जुड़ने का बेहद आसान तरीका है। यही वजह है कि सट्टे से लगातार लोग जुड़ते जा रहे हैं। ऑनलाइन सट्टे में पकड़े जाने का खतरा काफी कम होता है।
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दस साल से अधिक समय तक दुबई में रहकर जितेंद्र ने ऑनलाइन सट्टेबाजी का रैकेट खड़ा किया था। वहीं यूएस जाकर कई बड़े बुकी केसाथ भी काम किया था। सूत्रों केमुताबिक सटोरियों केपास से जो दस्तावेज बरामद हुए हैं, उसमें दुबई व यूएस केपांच बुकी केनाम शामिल हैं। कानपुर व वाराणसी समेत अन्य राज्यों में बैठकर इन बुकी केसहारे वह विदेश में सट्टेबाजी का खेल चला रहा था। लखनऊ एसटीएफ के सीओ प्रमेश शुक्ला ने बताया कि चारों रजिस्टरों में सट्टेबाजी का लेखा जोखा लिखा हुआ है। बुकी केनाम, बेटिंग की रकम, किससे कितना लेनदेन है आदि। सट्टा खेलने के दौरान जो फौरी तौर पर जानकारी एक दूसरे से सटोरिए लेते थे वो भी इन्हीं रजिस्टरों में लिखी जाती थी।
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सटोरिए लंदन केएप ऑरेंज केजरिए पूरा रैकेट चला रहे थे। जानकारों के मुताबिक इस एप केजरिए जो लोग जुड़ते थे, उनकेबारे में सट्टा खिलाने वालों को पूरी जानकारी रहती थी। इससे किसी भी तरह की धोखाधड़ी का खतरा नहीं रहता था। सट्टे की वेबसाइट की अपेक्षा एप पर सट्टा खेलना काफी सुरक्षित है। इसलिए ये सटोरिए एप का इस्तेमाल करते थे।
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एसटीएफ के मुताबिक मौके से जो साक्ष्य मिले हैं उससे पता चला है कि कम से कम एक पेटी की बेटिंग लगाई जाती थी। अधिकतम 50 पेटी की बेट लगाई गई। हालांकि एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि जो लेखा जोखा बरामद हुआ वह एक से दो दिन का है, इसलिए पूरी संभावना है कि करोड़ों में भी लगाई जाती होगी।
पर्ची और लॉटरी से सट्टा अब गुजरे जमाने की बात हो गई है। अब घर बैठे मोबाइल पर लाखों- करोड़ों का सट्टा चल रहा है। कोई एप केजरिए तो कोई अलग-अलग वेबसाइट पर सट्टा खेल रहे हैं। हर साल आईपीएल केवक्त ऑनलाइन सट्टा बाजार अधिक गर्म हो जाता है। जानकारों के मुताबिक सैकड़ों ऐसी वेबसाइट पर जहां पर हर वक्त किसी न किसी खेल पर या अन्य गतिविधियों पर सट्टा चलता रहा है। उससे जुड़ने का बेहद आसान तरीका है। यही वजह है कि सट्टे से लगातार लोग जुड़ते जा रहे हैं। ऑनलाइन सट्टे में पकड़े जाने का खतरा काफी कम होता है।