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मुकदमे के बावजूद मिलीभगत से बनवाया था पासपोर्ट
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वाराणसी/ आजमगढ़। बाबतपुर एयरपोर्ट पर प्रतिबंधित पासपोर्ट के साथ पकड़े गए खुदादादपुर निवासी मो. फैज पर 2001 में प्रतिबंधित संगठन सिमी का सदस्य होने के आरोप में आजमगढ़ के निजामाबाद थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बावजूद उसने पुलिस से मिलीभगत कर पासपोर्ट बनवा लिया और शारजाह आता-जाता रहा। इस बीच एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) ने दिसंबर, 2018 में आजमगढ़ पुलिस के अधिकारियों को रिपोर्ट दी कि मुकदमा दर्ज होने के बावजूद पासपोर्ट बनवा कर फैज विदेश आ-जा रहा है। इसके बाद फैज के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) जारी किया गया था। मो. फैज शारजाह में सिलाई का काम करता है। उसके अन्य भाई वहीं हैं।
आजमगढ़ के निजामाबाद थाने में 2001 में आजमगढ़ के सहरिया के जावेद अहमद, मऊ के डोमनपुरा के मकबूल अहमद और खुदादादपुर के शाहजाद अहमद, फारूक अहमद, अब्दुल रहमान व मो. फैज के खिलाफ सिमी का सदस्य होने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। यह कार्रवाई दरोगा बद्री प्रसाद कन्नौजिया की सूचना पर की गई थी। मुकदमे के संबंध में पुलिस की ओर से आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया जा चुका है। मामला विचाराधीन है।
उधर, देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता सहित अन्य संगीन धाराओं में केस दर्ज होने के बावजूद जांच पड़ताल किए बगैर ही पुलिस ने पासपोर्ट के लिए स्वीकृति प्रदान कर दी। जांच अधिकारी आजमगढ़ के एसपी ग्रामीण नरेंद्र प्रताप सिंह ने माना कि मो. फैज के पासपोर्ट आवेदन की बगैर किसी जांच पड़ताल के सभी ने अपनी रिपोर्ट लगा दी। रिपोर्ट कैसे और किन परिस्थितियों में लगाई गई है, इसकी जांच की जा रही। मो. फैज का पासपोर्ट बनवाने के लिए मुंबई के एक टीवी न्यूज चैनल के रिपोर्टर की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
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सिमी के पदाधिकारी रहे 54 की गतिविधियों पर नजर
प्रतिबंधित संगठन सिमी के पूर्व में बनारस, आजमगढ़ और भदोही में 54 पदाधिकारी रहे हैं। इन सभी की गतिविधियों पर हमेशा एटीएस की नजर रहती है और बीच-बीच में गुपचुप तरीके से उनका सत्यापन जारी रहता है। सत्यापन के दौरान ही मो. फैज की करतूत सामने आई और वो पकड़ा गया।
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आजमगढ़ में मुकदमा दर्ज, जेल भेजा
आजमगढ़। सोमवार को थाना प्रभारी निरीक्षक योगेंद्र बहादुर सिंह की तहरीर पर केस दर्ज कर मो. फैज का चालान कर दिया गया। थाना प्रभारी ने धोखाधड़ी, कूट रचिचित दस्तावेज पेश करते हुए लाभ लेने, अवैधानिक क्रियाकलाप निवारण अधिनियम 1967, आठ नोटरी अधिनियम के तहत केस दर्ज कराते हुए चालान कर दिया। बाद में उसे जेल भेज दिया गया।
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आजमगढ़ के निजामाबाद थाने में 2001 में आजमगढ़ के सहरिया के जावेद अहमद, मऊ के डोमनपुरा के मकबूल अहमद और खुदादादपुर के शाहजाद अहमद, फारूक अहमद, अब्दुल रहमान व मो. फैज के खिलाफ सिमी का सदस्य होने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। यह कार्रवाई दरोगा बद्री प्रसाद कन्नौजिया की सूचना पर की गई थी। मुकदमे के संबंध में पुलिस की ओर से आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया जा चुका है। मामला विचाराधीन है।
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उधर, देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता सहित अन्य संगीन धाराओं में केस दर्ज होने के बावजूद जांच पड़ताल किए बगैर ही पुलिस ने पासपोर्ट के लिए स्वीकृति प्रदान कर दी। जांच अधिकारी आजमगढ़ के एसपी ग्रामीण नरेंद्र प्रताप सिंह ने माना कि मो. फैज के पासपोर्ट आवेदन की बगैर किसी जांच पड़ताल के सभी ने अपनी रिपोर्ट लगा दी। रिपोर्ट कैसे और किन परिस्थितियों में लगाई गई है, इसकी जांच की जा रही। मो. फैज का पासपोर्ट बनवाने के लिए मुंबई के एक टीवी न्यूज चैनल के रिपोर्टर की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
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सिमी के पदाधिकारी रहे 54 की गतिविधियों पर नजर
प्रतिबंधित संगठन सिमी के पूर्व में बनारस, आजमगढ़ और भदोही में 54 पदाधिकारी रहे हैं। इन सभी की गतिविधियों पर हमेशा एटीएस की नजर रहती है और बीच-बीच में गुपचुप तरीके से उनका सत्यापन जारी रहता है। सत्यापन के दौरान ही मो. फैज की करतूत सामने आई और वो पकड़ा गया।
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आजमगढ़ में मुकदमा दर्ज, जेल भेजा
आजमगढ़। सोमवार को थाना प्रभारी निरीक्षक योगेंद्र बहादुर सिंह की तहरीर पर केस दर्ज कर मो. फैज का चालान कर दिया गया। थाना प्रभारी ने धोखाधड़ी, कूट रचिचित दस्तावेज पेश करते हुए लाभ लेने, अवैधानिक क्रियाकलाप निवारण अधिनियम 1967, आठ नोटरी अधिनियम के तहत केस दर्ज कराते हुए चालान कर दिया। बाद में उसे जेल भेज दिया गया।