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बिना टेंडर के दे दिया करोड़ों का ठेका

Sun, 18 Jun 2017 01:07 AM IST
Updated Sun, 18 Jun 2017 01:07 AM IST
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बिना टेंडर के  दे दिया करोड़ों का ठेका
वाराणसी। वरुणा कॉरिडोर निर्माण में एक बड़ी धांधली पकड़ी गई है। 191.56 करोड़ का इसका ठेका बिना टेंडर के ही दे दिया गया है। टेंडर प्रक्रिया न होने से सरकार को कम से कम 20 लाख रुपये की चपत लगने का अनुमान है। पूर्ववर्ती सपा सरकार में हुआ यह खेल पकड़ में आने के बाद सूबे की सरकार ने इसकी जांच शुरू करा दी है। पता चला है कि पूर्ववर्ती सपा सरकार में एक कद्दावर मंत्री के इशारे पर पूरा खेल किया गया। सूत्रों की मानें तो जिस कंपनी को वरुणा कॉरिडोर का काम दिया गया है, उसमें सपा के ये पूर्व मंत्री साझीदार हैं।
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पिछली बसपा सरकार में जिस तरह तत्कालीन विधायक उमाशंकर सिंह की कंपनी को बिना टेंडर ठेके दिए जाते रहे, कुछ वैसी ही मेहरबानी पूर्ववर्ती सपा सरकार ने अपनी चुनिंदा कंपनियों पर की। इन्हीं में एक कंपनी है एपको, जिसको वाराणसी में वरुणा कॉरिडोर के साथ ही कुछ काम रिंग रोड का भी दिया गया है। नदी संरक्षण को दरकिनार कर बनाई गई वरुणा कॉरिडोर योजना भाजपा सरकार बनने के बाद से ही सवालों में घिर गई। दो बार इसके गोदामों में रहस्यमय तरीके से आग लग चुकी है, जिसकी अलग जांच चल रही है। अब पता चला है कि कॉरिडोर का पूरा ठेका ही बिना टेंडर के दे दिया गया। यदि टेंडर प्रक्रिया होती तो प्रतिस्पर्धी दरों से सरकार को फायदा होने के साथ ही स्टांप शुल्क के तौर पर तकरीबन बीस लाख रुपये राजस्व प्राप्त होता। मामला सामने आने पर सिंचाई विभाग अपना पीछा छुड़ाने में जुट गया है। उसका कहना है कि ठेका उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कॉरपोरशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने दिया था। बहरहाल जिला प्रशासन ने सरकार को पूरे मामले की जानकारी दे दी है। सरकार पूरे मामले की पड़ताल करा रही है। जल्द ही इस मामले में बड़ी कार्रवाई सामने आ सकती है।
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मामले में सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता सोन, सुरेशचंद्र शर्मा का कहना है कि सिंचाई विभाग का यूपीपीसीएल के साथ वरुणा कॉरिडोर निर्माण का एमओयू हुआ था। यूपीपीसीएल ने ही निर्माण का ठेका दिया है। ठेका कैसे और किन परिस्थितियों में दिया गया, इसका पता लगाया जा रहा है।
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काफी गहरी हैं कॉरिडोर में भ्रष्टाचार की जड़ें
वरुणा कॉरिडोर में भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी हैं। जो काम जनवरी 2017 तक पूरा हो जाना था, वह मार्च 2017 तक महज 40 प्रतिशत पूरा हो पाया जबकि बजट करीब 70 प्रतिशत खर्च कर दिया गया। इसके तहत 10.30 किलोमीटर के चैनलाइजेशन के अलावा पांच घाटों का निर्माण होना है। वरुणा नदी में गिरने वाले सीवर लाइन को चौकाघाट में बन रहे एसटीपी से जोड़ना है। वर्तमान में 6.55 कि लोमीटर के चैनलाइजेशन के अलावा तीन घाट बनाए गए हैं। काम की गति बेहद धीमी है। नदी संरक्षण के उपाय दरकिनार कर तटबंध और घाटों के निर्माण पर पानी की तरह पैसा बहाया गया। नदी विशेषज्ञ और पर्यावरण प्रेमी इस पर सवाल उठा चुके हैं।


कार्रवाई नहीं करनी थी तो फिर नोटिस क्यों थमाया
वरुणा नदी के डूब क्षेत्र से कब्जा हटाने के बाद वरुणा कॉरिडोर की योजना पर काम होना था लेकिन सरकारी धन खर्च करने की जल्दबाजी में मनमाने तरीके से काम शुरू करा दिया गया और अवैध निर्माणों को नोटिस जारी करने के साल भर बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि, योजना से पहले सीमांकन कर वीडीए ने 762 अवैध निर्माण चिह्नित करते हुए उन्हें नोटिस जारी किया था जबकि सिंचाई विभाग ने 130 लोगों को। योजना में घपलेबाजी की परत दर परत उजागर होने के बाद योगी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सूत्रों की मानें तो शासन ने पूछा है कि कार्रवाई नहीं करनी थी तो नोटिस क्यों जारी किया गया। इससे प्रशासन के उच्चाधिकारियों के साथ ही संबंधित विभागों के अधिकारी सकते में हैं। सूत्रों की मानें तो डूब क्षेत्र के अवैध निर्माणों पर जल्द ही शासन के निर्देश पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है। बता दें कि कुल 201 करोड़ रुपये की वरुणा कॉरिडोर योजना में अवमुक्त हुए 125 करोड़ रुपये से नदी के तटबंध बनाए जा रहे हैं। अन्य कार्यों के लिए बाकी 75 करोड़ रुपये की डिमांड भी सिंचाई विभाग ने शासन से की है। तक भी पहुंची है।
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