आरबीआई के फर्जी प्रमाणपत्र दिखाकर 35 करोड़ हड़पे, कोर्ट के आदेश पर तीन राज्यों के 11 लोगों पर केस
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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के वित्तीय कारोबार के फर्जी प्रमाणपत्र दिखा कर एक कंपनी पर पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों के निवेशकों के 35 करोड़ रुपये हड़पने का आरोप लगा है। प्रकरण को लेकर अदालत के आदेश से सिगरा थाने में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और नई दिल्ली निवासी 11 आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और छल सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज हुआ है। यह कार्रवाई दशनीपुर के राजकुमार सिंह, भसौड़ी के चंद्रबली मौर्य और घुरहूपुर के कमलेश के प्रार्थना पत्र पर की गई है।
तीनों लोगों ने प्रार्थना पत्र दिया कि शास्त्री नगर स्थित एक अपार्टमेंट में केएमजे लैंड डेवलपर्स इंडिया लिमिटेड कंपनी खुली थी। इसमें तीनों एजेंट थे। कंपनी के लोग आरबीआई का वित्तीय कारोबार संबंधी फर्जी प्रमाणपत्र दिखाकर लोगों को झांसा देते थे कि वह अच्छे निवेशक हैं। कंपनी के लोग अन्य लोगों को प्रेरित करते थे कि वह उनके माध्यम से निवेश करें तो उसका अच्छा रिटर्न मिलेगा।
इस तरह से पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों के लोगों ने 35 करोड़ रुपये से ज्यादा कंपनी के माध्यम से निवेश किए। इसके बाद फर्जी कोआपरेटिव सोसाइटी बना कर पैसे हड़प लिए और यह सिलसिला अभी भी जारी है। कंपनी ने जिले में काफी जमीन अर्जित कर ली है और निवेशकों के साथ धोखा हुआ है। इस संबंध में इंस्पेक्टर सिगरा एके ओझा ने बताया कि अदालत के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
इनके खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
झांसी के आंबेडकर नगर बसुरु सागर राजेंद्र बाबू, आगरा के अटल नगर के गोपाल प्रसाद गुप्ता, नई दिल्ली के ईस्ट पटेल नगर के सैयद राशिद हाशमी, मध्य प्रदेश के ग्वालियर के संतोषी लाल राठौर, सुनील सिंह, दिलीप कुमार जैन, सतेंद्र सिंह सिकरवार, मनोज कुमार सविता, जय प्रकाश नायक और मुरैना के महेश कुमार सोलंकी व रविकांत आरोलिया।