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अंधेरा कोना में लोकतंत्र की विकृतियों पर चोट

Thu, 14 Mar 2019 02:34 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 14 Mar 2019 02:34 AM IST
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अंधेरा कोना में लोकतंत्र की विकृतियों पर चोट
वाराणसी। बीएचयू हिंदी विभाग के शोध छात्रों के सामूहिक प्रयास से गठित समकालीन संवेदन की ओर से आयोजित परिचर्चा और संवाद में उपन्यास अंधेरा कोना पर वक्ताओं ने चर्चा की। इस दौरान कथा आलोचक प्रो. बलिराज पांडेय ने युवा कथाकार उमाशंकर चौधरी के इस उपन्यास के बारे में कहा कि इसमें लोकतंत्र की विकृतियों पर चोट की गई है।
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उपन्यास पर बोलते हुए प्रो. बलिराज ने कहा कि उमाशंकर का यह उपन्यास असंयमित विकास के मॉडल की आलोचना प्रस्तुत करता हुआ उपन्यास है। कवि प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि उमाशंकर चौधरी का यह उपन्यास उनकी रचना-प्रक्रिया का आर्गेनिक विकास है। प्रो.राजकुमार ने कहा कि कोई भी रचना तब तक श्रेष्ठ नहीं होती जब तक वह अपनी परंपरा से संवाद न करे। युवा कवयित्री ज्योति चावला ने उपन्यास के बारे में अपने विचार रखे। डॉ. प्रभाकर सिंह ने कहा कि यह उपन्यास एक कवि का उपन्यास है। इस दौरान प्रो. मनोज सिंह, प्रो. अवधेश प्रधान, प्रो. आशीष त्रिपाठी के साथ ही शोध छात्र सुशांत वर्मा, दिवाकर तिवारी, जगन्नाथ दूबे, रंजना गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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