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पहली बार पक्के महाल में घुसी जेसीबी
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वाराणसी। अब तब के इतिहास में पहली बार पक्के महाल क्षेत्र में जेसीबी घुसी, जो चर्चा का विषय रहा। पहले दिन जेसीबी ने ध्वस्तीकरण का कार्य शुरू कर दिया और सबसे पहले उसने पांचो पंडवा भवन को पूरी तरह से धराशाई कर दिया। इसके अलावा कई अन्य भवनों को भी देखते ही देखते जमींदोज कर दिया।
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर को लेकर भवनों के ध्वस्तीकरण का कार्य किया जा रहा है। संकरी गलियां और ऊंचे भवन होने के चलते अब तक जो कार्य मजदूरों से धीरे-धीरे हो रहा था। वह शनिवार से तेज गति से शुरू हो गया। जब जेसीबी छत्ताद्वार के पास पहुंची तो सभी लोग आशंकति थे, लेकिन जैसे जैसे वह अंदर प्रवेश करती गई, देखने वालों की भीड़ लग गई है। सभी का कहना था कि जिन गलियों में पैदल चलना मुश्किल था, उन गलियों में आज जेसीबी पहुंच गई। देर रात तक जेसीबी ने कई मकानों को गिराकर्र साफ कर दिया और मलबे को भी पूरा हटा दिया। अधिकारियों ने कहा कि अब बहुत तेजी से कार्य किया जाएगा।
एक हजार बटुकों ने किया भोजन
वाराणसी। पूर्णिमा के पर्व पर नियमानुसार भोग आरती के बाद काशी के वैदिक बटुकों को शनिवार को भोजन कराया। करीब एक हजार बटुकों को भोजन व दक्षिणा की व्यवस्था मंदिर द्वारा की गई। इस बार यह भोजन का कार्यक्रम मंदिर प्रांगण में न होकर कालिका गली में कराया गया। सबसे पहले साढ़े बारह बजे से वैदिक बटुकों को तिलक लगाकर लिफाफे में दक्षिणा प्रदान की गई । बटुक भोजन के पश्चात आम दर्शनार्थियों को भोजन के लिए प्रवेश दिया गया। इसमें साढ़े पांच सौ बटुक दशाश्वमेध स्थित शास्त्रार्थ महाविद्यालय के उपसिथत रहे।
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काशी विश्वनाथ कॉरिडोर को लेकर भवनों के ध्वस्तीकरण का कार्य किया जा रहा है। संकरी गलियां और ऊंचे भवन होने के चलते अब तक जो कार्य मजदूरों से धीरे-धीरे हो रहा था। वह शनिवार से तेज गति से शुरू हो गया। जब जेसीबी छत्ताद्वार के पास पहुंची तो सभी लोग आशंकति थे, लेकिन जैसे जैसे वह अंदर प्रवेश करती गई, देखने वालों की भीड़ लग गई है। सभी का कहना था कि जिन गलियों में पैदल चलना मुश्किल था, उन गलियों में आज जेसीबी पहुंच गई। देर रात तक जेसीबी ने कई मकानों को गिराकर्र साफ कर दिया और मलबे को भी पूरा हटा दिया। अधिकारियों ने कहा कि अब बहुत तेजी से कार्य किया जाएगा।
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एक हजार बटुकों ने किया भोजन
वाराणसी। पूर्णिमा के पर्व पर नियमानुसार भोग आरती के बाद काशी के वैदिक बटुकों को शनिवार को भोजन कराया। करीब एक हजार बटुकों को भोजन व दक्षिणा की व्यवस्था मंदिर द्वारा की गई। इस बार यह भोजन का कार्यक्रम मंदिर प्रांगण में न होकर कालिका गली में कराया गया। सबसे पहले साढ़े बारह बजे से वैदिक बटुकों को तिलक लगाकर लिफाफे में दक्षिणा प्रदान की गई । बटुक भोजन के पश्चात आम दर्शनार्थियों को भोजन के लिए प्रवेश दिया गया। इसमें साढ़े पांच सौ बटुक दशाश्वमेध स्थित शास्त्रार्थ महाविद्यालय के उपसिथत रहे।
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