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बीएचयू चीफ प्राक्टर सहित चार नामजद के खिलाफ परिवाद0
Updated Sun, 18 Mar 2018 02:35 AM IST
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वाराणसी। बीएचयू की चीफ प्राक्टर रोयाना सिंह समेत चार नामजद और 10 अज्ञात सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम की अदालत में जानलेवा हमला, लूटपाट और अगवा करने के आरोप में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया है। अदालत ने इस प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश देते हुए परिवादी के बयान के लिए 31 मार्च की तिथि नियत की है।
लंका थाना अंतर्गत तुलसीदास कालोनी नरिया निवासी आशीष कुमार सिंह ने अपने अधिवक्ता अंशुमान त्रिपाठी के जरिये अदालत में प्रार्थना पत्र दिया था। प्रार्थना पत्र में कहा कि प्रार्थी बीएचयू परिसर से सटी जमीन पर दुकान खोलकर भूसा और पशुओं के चारा का व्यवसाय करता है। उस जमीन पर उसका परिवार सौ वर्ष से रहता चला आ रहा है। आरोप है कि बीते सात मार्च को सुबह नौ बजे बीएचयू की चीफ प्राक्टर रोयाना सिंह, बीएचयू संपदा विभाग के अधिकारी लालबाबू पटेल, सुरक्षाकर्मी सुनील सिंह व विनोद सिंह के साथ 10 अज्ञात सुरक्षाकर्मी दो चारपहिया वाहन से पहुंचे। सभी परिवादी को गालियां देते हुए उक्त स्थान को बीएचयू की संपत्ति बताते हुए जगह खाली करने को कहने लगे। जब परिवादी ने चीफ प्राक्टर को कोर्ट का स्थगन आदेश दिखाया तो चीफ प्रॉक्टर ने उसे फाड़ दिया। उसके बाद उनके साथ आए लोगों ने जान से मारने की नीयत से परिवादी के सिर पर डंडे से वार किया। इसके बाद सभी परिवादी को जबरन अपनी गाड़ी में बैठाकर ले गए। बाद में जब आसपास के लोगों के साथ उसके परिवार के लोग चीफ प्राक्टर के पास पहुंचे तो पहले तो उन्होंने परिवादी को अगवा कर लाने की बात से इनकार किया। मगर, फिर बात बढ़ते देख परिवादी को घटना के बारे में किसी को न बताने की हिदायत देते हुए छोड़ दिया। इस मामले में लंका थाने व उच्चाधिकारियों को सूचना देने के बाद भी जब कोई करवाई न हुई तो परिवादी ने अदालत की शरण ली।
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लंका थाना अंतर्गत तुलसीदास कालोनी नरिया निवासी आशीष कुमार सिंह ने अपने अधिवक्ता अंशुमान त्रिपाठी के जरिये अदालत में प्रार्थना पत्र दिया था। प्रार्थना पत्र में कहा कि प्रार्थी बीएचयू परिसर से सटी जमीन पर दुकान खोलकर भूसा और पशुओं के चारा का व्यवसाय करता है। उस जमीन पर उसका परिवार सौ वर्ष से रहता चला आ रहा है। आरोप है कि बीते सात मार्च को सुबह नौ बजे बीएचयू की चीफ प्राक्टर रोयाना सिंह, बीएचयू संपदा विभाग के अधिकारी लालबाबू पटेल, सुरक्षाकर्मी सुनील सिंह व विनोद सिंह के साथ 10 अज्ञात सुरक्षाकर्मी दो चारपहिया वाहन से पहुंचे। सभी परिवादी को गालियां देते हुए उक्त स्थान को बीएचयू की संपत्ति बताते हुए जगह खाली करने को कहने लगे। जब परिवादी ने चीफ प्राक्टर को कोर्ट का स्थगन आदेश दिखाया तो चीफ प्रॉक्टर ने उसे फाड़ दिया। उसके बाद उनके साथ आए लोगों ने जान से मारने की नीयत से परिवादी के सिर पर डंडे से वार किया। इसके बाद सभी परिवादी को जबरन अपनी गाड़ी में बैठाकर ले गए। बाद में जब आसपास के लोगों के साथ उसके परिवार के लोग चीफ प्राक्टर के पास पहुंचे तो पहले तो उन्होंने परिवादी को अगवा कर लाने की बात से इनकार किया। मगर, फिर बात बढ़ते देख परिवादी को घटना के बारे में किसी को न बताने की हिदायत देते हुए छोड़ दिया। इस मामले में लंका थाने व उच्चाधिकारियों को सूचना देने के बाद भी जब कोई करवाई न हुई तो परिवादी ने अदालत की शरण ली।
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