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तालाब की खुदाई में पकड़ी धांधली
Updated Fri, 09 Mar 2018 01:16 AM IST
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ज्ञानपुर। जल संरक्षण के लिए चलाई गई जल बचाओ योजना भी भ्रष्टाचार की भेंट बढ़ गई। उमरिया गांव में खोदे गए तालाब की जांच में 24 हजार क्यूबिक (घन फीट) मिट्टी का लेखाजोखा नहीं मिल पा रहा है। एसडीएम ज्ञानपुर की जांच रिपोर्ट के बाद प्रकरण से जुड़े अफसरों की धुकधुकी बढ़ गई है। मामले की पहली जांच करने वाले तीन अफसरों ने कार्यदायी संस्था को बचाने के लिए क्लीन चिट दे दी थी।
वित्तीय वर्ष 2015-16 में भारत सरकार ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत वर्षा जल बचाने के लिए तालाबों के निर्माण के लिए लघु सिंचाई विभाग से प्रस्ताव मांगा था। विभाग की ओर से 12 तालाबों के लिए 56- 56 लाख बजट की मांग की थी। शासन ने जिले में चार तालाबों को स्वीकृति प्रदान किया, जिसमें ज्ञानपुर के उमरिया, बलापुर, सुरियावां में कौड़र, भदोही में दत्तीपुर शामिल है। विभाग के डिमांड के सापेक्ष 35-35 लाख अवमुक्त किया गया था। विभाग की ओर से निर्माण एजेंसी से तालाब खुदवाया गया। शिकायत पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने उपायुक्त मनरेगा अजीत कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग और अवर अभियंता आरईएस की टीम गठित कर जांच का निर्देश दिया। जांच टीम ने बिना काम कराए भुगतान की रिपोर्ट दिया। एजेंसी की मांग पर डीएम ने दोबारा जांच विकास भवन के दो अफसरों से कराई। अफसरों ने एजेंसी को बचाने के लिए क्लीन मामले को रफा-दफा कर दिया था। इसकी शिकायत होने पर डीएम विशाख जी ने एसडीएम ज्ञानपुर आशीष कुमार को जांच सौंपी। इस दौरान 36 हजार क्यूबिक मिट्टी में सिर्फ 12 हजार क्यूबिक मिट्टी ही मौके पर मिली। कई और तकनीकी खामियां सामने आईं। जिलाधिकारी ने कहा कि एसडीएम की जांच रिपोर्ट मिल गई है। 24 हजार क्यूबिक मिट्टी का लेखाजोखा नहीं मिल पा रहा है। इस धांधली में जो भी दोषी होंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।
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वित्तीय वर्ष 2015-16 में भारत सरकार ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत वर्षा जल बचाने के लिए तालाबों के निर्माण के लिए लघु सिंचाई विभाग से प्रस्ताव मांगा था। विभाग की ओर से 12 तालाबों के लिए 56- 56 लाख बजट की मांग की थी। शासन ने जिले में चार तालाबों को स्वीकृति प्रदान किया, जिसमें ज्ञानपुर के उमरिया, बलापुर, सुरियावां में कौड़र, भदोही में दत्तीपुर शामिल है। विभाग के डिमांड के सापेक्ष 35-35 लाख अवमुक्त किया गया था। विभाग की ओर से निर्माण एजेंसी से तालाब खुदवाया गया। शिकायत पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने उपायुक्त मनरेगा अजीत कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग और अवर अभियंता आरईएस की टीम गठित कर जांच का निर्देश दिया। जांच टीम ने बिना काम कराए भुगतान की रिपोर्ट दिया। एजेंसी की मांग पर डीएम ने दोबारा जांच विकास भवन के दो अफसरों से कराई। अफसरों ने एजेंसी को बचाने के लिए क्लीन मामले को रफा-दफा कर दिया था। इसकी शिकायत होने पर डीएम विशाख जी ने एसडीएम ज्ञानपुर आशीष कुमार को जांच सौंपी। इस दौरान 36 हजार क्यूबिक मिट्टी में सिर्फ 12 हजार क्यूबिक मिट्टी ही मौके पर मिली। कई और तकनीकी खामियां सामने आईं। जिलाधिकारी ने कहा कि एसडीएम की जांच रिपोर्ट मिल गई है। 24 हजार क्यूबिक मिट्टी का लेखाजोखा नहीं मिल पा रहा है। इस धांधली में जो भी दोषी होंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।
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