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केदारघाट से चौकीघाट के बीच गंगा में सीधे गिर रहा सीवेज
Updated Thu, 01 Mar 2018 02:12 AM IST
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वाराणसी। काशी के चुनिंदा घाटों को छोड़कर बाकी घाटों की हालत खराब है। घाट की सीढि़यां उखड़ रही हैं तो चारो ओर गंदगी फैली है। घाट पड़ताल की कड़ी में बुधवार को केदारघाट से चौकीघाट के बीच काफी गंदगी देखने को मिली। चारो ओर घाट पर कपड़े धोकर फैलाए गए हैं। गंगा निर्मलीकरण अभियान को जिम्मेदार अधिकारी और प्रशासनिक मशीनरी पलीता लगा रही हैं। पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं को समेटे इन घाटों पर सीवेज सीधे गंगा में गिर रहा है और कोई देखने वाला नहीं है।
केदारघाट से चौकीघाट, नारद घाट तक गंगा किनारे की हालत काफी खराब है। घाट पर यूरिनल की व्यवस्था नहीं होने से जगह-जगह लोग यूरिनल किए हैं। बदबू से घाट पर निकलना दुश्वार है। यह तब है जब पर्यटन विभाग की ओर अस्थायी यूरिनल लगाने का दावा किया जाता है। एकाध जगह लगाया भी गया है तो वह इस्तेमाल करने लायक नहीं है। गंगा किनारे घाटों की सीढि़या टूटने से उधर से निकलना भी खतरनाक है।
केदारघाट पर पशुओं का झुंड होने से सैलानियों को परेशानी होती है। इससे जगह-जगह गोबर फैला हुआ है। घाटों पर गंदगी न हो इसके लिए नगर निगम ने आईएलएफएस को लगाया गया है। लेकिन घाटों पर गंदगी फैली हुई है। किनारे पानी में फूलमाला, कचरा फैला हुआ है। जलस्तर लगातार कम होने से केेदारघाट पर गंगा घाट भी छोड़ चुकी हैं। राजू माझी का कहना है कि सफाई के नाम पर कई योजनाएं चल रही है मगर गंगा में लगातार गंदगी बढ़ती जा रही है। मोहन निषाद का कहना है कि सरकारी धन की बंदरबाट हो रही है। गंगा की सफाई के लिए कोई गंभीर नहीं है।
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केदारघाट से चौकीघाट, नारद घाट तक गंगा किनारे की हालत काफी खराब है। घाट पर यूरिनल की व्यवस्था नहीं होने से जगह-जगह लोग यूरिनल किए हैं। बदबू से घाट पर निकलना दुश्वार है। यह तब है जब पर्यटन विभाग की ओर अस्थायी यूरिनल लगाने का दावा किया जाता है। एकाध जगह लगाया भी गया है तो वह इस्तेमाल करने लायक नहीं है। गंगा किनारे घाटों की सीढि़या टूटने से उधर से निकलना भी खतरनाक है।
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केदारघाट पर पशुओं का झुंड होने से सैलानियों को परेशानी होती है। इससे जगह-जगह गोबर फैला हुआ है। घाटों पर गंदगी न हो इसके लिए नगर निगम ने आईएलएफएस को लगाया गया है। लेकिन घाटों पर गंदगी फैली हुई है। किनारे पानी में फूलमाला, कचरा फैला हुआ है। जलस्तर लगातार कम होने से केेदारघाट पर गंगा घाट भी छोड़ चुकी हैं। राजू माझी का कहना है कि सफाई के नाम पर कई योजनाएं चल रही है मगर गंगा में लगातार गंदगी बढ़ती जा रही है। मोहन निषाद का कहना है कि सरकारी धन की बंदरबाट हो रही है। गंगा की सफाई के लिए कोई गंभीर नहीं है।
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