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हर मिशन फेल, गंगा जस की तस
Updated Sun, 25 Feb 2018 01:12 AM IST
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ज्ञानपुर। गंगा को निर्मल एवं अविरल बनाने के लिए सरकारों ने करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा दिए लेकिन धरातल पर सब कुछ पहले जैसा ही है। इससे दो दशक बाद भी गंगा का पानी साफ नहीं हो सका है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इच्छाशक्ति के अभाव से योजनाएं फलीभूत नहीं हो पा रहीं। जब तक हर कोई सहभागिता नहीं निभाएगा, गंगा को निर्मल बना पाना मुश्किल है।
जिले के दक्षिणी छोर से गुजरी गंगा इलाके के 45 से अधिक गांवों के किसानों के लिए अभयदान प्रदान करती है। पंप कैनाल से निकलने वाला पानी जहां सिंचाई के प्रयोग में लाया जाता है, वहीं सेमराध, सीतामढ़ी समेत कई धार्मिक स्थल भी स्थित हैं। कंपनियों के जहरीले पानी और अपशिष्ट के चलते गंगा में लगातार प्रदूषण बढ़ रहा है। वैसे तो दो दशक पूर्व ही गंगा को साफ करने की मुहिम शुरू हो गई थी, लेकिन 2014 में भाजपा की सरकार केंद्र में बनने पर नमामि गंगे योजना को लागू किया गया। इसके लिए 20 हजार करोड़ रुपये भी जारी हुए। चार साल से अधिक समय गुजरने के बाद भी इसका खास असर गंगा के स्वच्छता मिशन पर नहीं दिख रहा है। गंगा से सटे गांवों में करीब 50 हजार शौचालय जरूर बनाए जा रहे हैं, लेकिन सफाई को लेकर सिर्फ खानापूर्ति ही हो रही है। पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. एससी शुक्ला ने कहा कि गंगा में जाने वाले प्रदूषित पानी पर रोक लगे और सभी को मिशन में सहभागी होना पड़ेगा तभी गंगा अविरल हो सकेंगी। पर्यावरणविद् डॉ. कमाल अहमद सिद्दीकी की मानें तो इच्छाशक्ति की कमी से गंगा निर्मल नहीं हो पा रही हैं। सरकारी योजनाओं का धरातल पर बेहतर ढंग से उतारा जाए और उसे अमल में लाया जाए तो गंगा को साफ किया जा सकता है।
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जिले के दक्षिणी छोर से गुजरी गंगा इलाके के 45 से अधिक गांवों के किसानों के लिए अभयदान प्रदान करती है। पंप कैनाल से निकलने वाला पानी जहां सिंचाई के प्रयोग में लाया जाता है, वहीं सेमराध, सीतामढ़ी समेत कई धार्मिक स्थल भी स्थित हैं। कंपनियों के जहरीले पानी और अपशिष्ट के चलते गंगा में लगातार प्रदूषण बढ़ रहा है। वैसे तो दो दशक पूर्व ही गंगा को साफ करने की मुहिम शुरू हो गई थी, लेकिन 2014 में भाजपा की सरकार केंद्र में बनने पर नमामि गंगे योजना को लागू किया गया। इसके लिए 20 हजार करोड़ रुपये भी जारी हुए। चार साल से अधिक समय गुजरने के बाद भी इसका खास असर गंगा के स्वच्छता मिशन पर नहीं दिख रहा है। गंगा से सटे गांवों में करीब 50 हजार शौचालय जरूर बनाए जा रहे हैं, लेकिन सफाई को लेकर सिर्फ खानापूर्ति ही हो रही है। पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. एससी शुक्ला ने कहा कि गंगा में जाने वाले प्रदूषित पानी पर रोक लगे और सभी को मिशन में सहभागी होना पड़ेगा तभी गंगा अविरल हो सकेंगी। पर्यावरणविद् डॉ. कमाल अहमद सिद्दीकी की मानें तो इच्छाशक्ति की कमी से गंगा निर्मल नहीं हो पा रही हैं। सरकारी योजनाओं का धरातल पर बेहतर ढंग से उतारा जाए और उसे अमल में लाया जाए तो गंगा को साफ किया जा सकता है।
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