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कार्यकाल के बीच छुट्टी पर जाने की परंपरा पुरानी
Updated Wed, 04 Oct 2017 02:07 AM IST
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वाराणसी। बीएचयू कैंपस में बतौर कुलपति कार्यकाल बीच में ही छोड़कर जाने वालों की परंपरा नई नहीं है। 1990 के बाद से प्रो. जीसी त्रिपाठी ऐसे पांचवें कुलपति हैं। इससे पहले प्रो. रामचंद्र राव, मोती लाल धर, चंद्रशेखर झा और डीएन मिश्रा भी कार्यकाल के बीच ही छुट्टी पर चले गए थे। मोती लाल धर 2 फरवरी, 1977 से 15 दिसंबर, 1977 तक ही कुलपति रहे थे, जबकि चंद्रशेखर झा ने 1 मई, 1991 से 14 जून, 1993 तक यानी केवल 25 महीने से कुलपति पद की जिम्मेदारी संभाली। इसी तरह डीएन मिश्रा 8 फरवरी, 1994 से 27 जून, 1995 तक की अवधि में ही इस पद पर रहे।
बीएचयू के कुलपति का कार्यकाल तीन साल का होता है। अगर किसी कारणवश कुलपति समय से पहले पद छोड़ देते हैं या लंबे अवकाश पर चले जाते हैं, तो शेष अवधि में रेक्टर और रेक्टर न होने पर कुलसचिव को चार्ज दिया जाता है। 23 सितंबर को छात्राओं पर लाठीचार्ज और इसके बाद हुए बवाल के बाद प्रो. त्रिपाठी को कार्यकाल खत्म होने से दो महीने पहले ही लंबी छुट्टी पर जाना पड़ा है। अब उनकी वापसी पर अटकलें लगाई जा रही हैं।
दूसरी ओर इसी विश्वविद्यालय में कुलपति का दूसरा कार्यकाल पाने वालों में चार कुलपति शामिल हैं। एक नवंबर, 1969 को कुलपति बने कालू लाल श्रीमाली, 30 अप्रैल, 1985 में आरपी रस्तोगी, 19 अक्तूबर, 1981 को पदभार संभालने वाले इकबाल नारायन और इसके बाद वाईसी सिमाद्री 31 अगस्त, 1998 से 20 फरवरी, 2002 तक इस पद पर रहे।
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बीएचयू के कुलपति का कार्यकाल तीन साल का होता है। अगर किसी कारणवश कुलपति समय से पहले पद छोड़ देते हैं या लंबे अवकाश पर चले जाते हैं, तो शेष अवधि में रेक्टर और रेक्टर न होने पर कुलसचिव को चार्ज दिया जाता है। 23 सितंबर को छात्राओं पर लाठीचार्ज और इसके बाद हुए बवाल के बाद प्रो. त्रिपाठी को कार्यकाल खत्म होने से दो महीने पहले ही लंबी छुट्टी पर जाना पड़ा है। अब उनकी वापसी पर अटकलें लगाई जा रही हैं।
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दूसरी ओर इसी विश्वविद्यालय में कुलपति का दूसरा कार्यकाल पाने वालों में चार कुलपति शामिल हैं। एक नवंबर, 1969 को कुलपति बने कालू लाल श्रीमाली, 30 अप्रैल, 1985 में आरपी रस्तोगी, 19 अक्तूबर, 1981 को पदभार संभालने वाले इकबाल नारायन और इसके बाद वाईसी सिमाद्री 31 अगस्त, 1998 से 20 फरवरी, 2002 तक इस पद पर रहे।
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