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तस्करों की ‘माया’ से अफसर ‘लाल’
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वाराणसी। काशी रेलवे स्टेशन सोना, चांदी से लेकर दुर्लभ जीवों की तस्करी का अड्डा बना हुआ है, लेकिन जिम्मेदार अफसर नजरें फेरे हुए हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि तस्कर पद के हिसाब से सबकी मुट्ठी गर्म रखते हैं। यह हाल तब है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में विश्वनाथ कॉरिडोर के साथ काशी रेलवे स्टेशन को इंटर मॉडल स्टेशन बनाने की योजना भी शामिल है।
यात्रियों का कम दबाव और हमेशा सुनसान रहने वाले काशी रेलवे स्टेशन से पंजाब, कोलकाता, धनबाद, फि रोजपुर, मुंबई के साथ कई प्रदेश से आने वाली ट्रेनें गुजरती हैं। सूत्रों के अनुसार, काशी स्टेशन पर रोजाना कच्ची चांदी, सोना, मादक पदार्थ और दुर्लभ जीवों की तस्करी होती है। बिना बिल बिल्टी वाले पार्सल भी पहुंचते हैं। इसकी जानकारी विभाग के अधिकारियों को है, लेकिन सबकी मुठ्ठी पद के हिसाब से गर्म की जाती है। इसी के दम पर तस्करों को अभयदान मिलता है। तस्करों को इतनी सुरक्षा मुहैया कराई जाती है कि अगर कोई यात्री इसका विरोध करता है तो उसे जीआरपी धमकाती है। कैंट, सिटी और मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन पर आने जाने वाले पार्सल और यात्रियों की जांच की जाती है, लेकिन काशी रेलवे स्टेशन चारों ओर से खुला होने के बाद भी जीआरपी और आरपीएफ इस ओर नजर ही नहीं डालते। खानापूर्ति के लिए कुछ माह पहले जीआरपी ने एक पैसेंजर ट्रेन से दुर्लभ प्रजाति के कछुए जरूर पकड़े थे।
चर्चित है कोयले और बालू की रेक
चार प्लेटफ ार्म वाले काशी रेलवे स्टेशन के बगल में रेलवे का माल गोदाम है। यह कोयले और बालू की रेक के लिए कुख्यात रहा है। पूर्वांचल के बड़े माफि या यहां निगाहें गड़ाए रहते हैं। अब तक यहां अगर कुछ नहीं बदला है तो वह है विभागीय साठगांठ। इस माल गोदाम में एशिया की सबसे बड़ी कोयला मंडी चंदासी समेत रसूखदार ईंट भट्टा मालिकों और कोयला व्यवसायियों के लिए कोयले की रेक लाई जाती है। इसके अलावा लाल बालू की रेक के लिए भी यह माल गोदाम जाना जाता है। कोयले और बालू की रेक से विभाग के कई अधिकारी ‘लाल’ हो गए। अब भी माल गोदाम में रेक लगने के बाद वसूली करने वाले कारखास सक्रिय हो जाते हैं।
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कैंट, मंडुवाडीह, सिटी पर फोकस, काशी अंधेरे में
रेलवे प्रशासन का भी पूरा फोकस कैंट, मंडुवाडीह और सिटी स्टेशन पर है। ऐसे में काशी रेलवे स्टेशन पर अवैध कारोबार करने और करवाने वाले अपना धंधा बिना रोकटोक के कर रहे हैं। ऊपरी कमाई के फेर में अफसर इस रेलवे स्टेशन की उपयोगिता बताने और इसके विकास से बचते हैं।
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यात्रियों का कम दबाव और हमेशा सुनसान रहने वाले काशी रेलवे स्टेशन से पंजाब, कोलकाता, धनबाद, फि रोजपुर, मुंबई के साथ कई प्रदेश से आने वाली ट्रेनें गुजरती हैं। सूत्रों के अनुसार, काशी स्टेशन पर रोजाना कच्ची चांदी, सोना, मादक पदार्थ और दुर्लभ जीवों की तस्करी होती है। बिना बिल बिल्टी वाले पार्सल भी पहुंचते हैं। इसकी जानकारी विभाग के अधिकारियों को है, लेकिन सबकी मुठ्ठी पद के हिसाब से गर्म की जाती है। इसी के दम पर तस्करों को अभयदान मिलता है। तस्करों को इतनी सुरक्षा मुहैया कराई जाती है कि अगर कोई यात्री इसका विरोध करता है तो उसे जीआरपी धमकाती है। कैंट, सिटी और मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन पर आने जाने वाले पार्सल और यात्रियों की जांच की जाती है, लेकिन काशी रेलवे स्टेशन चारों ओर से खुला होने के बाद भी जीआरपी और आरपीएफ इस ओर नजर ही नहीं डालते। खानापूर्ति के लिए कुछ माह पहले जीआरपी ने एक पैसेंजर ट्रेन से दुर्लभ प्रजाति के कछुए जरूर पकड़े थे।
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चर्चित है कोयले और बालू की रेक
चार प्लेटफ ार्म वाले काशी रेलवे स्टेशन के बगल में रेलवे का माल गोदाम है। यह कोयले और बालू की रेक के लिए कुख्यात रहा है। पूर्वांचल के बड़े माफि या यहां निगाहें गड़ाए रहते हैं। अब तक यहां अगर कुछ नहीं बदला है तो वह है विभागीय साठगांठ। इस माल गोदाम में एशिया की सबसे बड़ी कोयला मंडी चंदासी समेत रसूखदार ईंट भट्टा मालिकों और कोयला व्यवसायियों के लिए कोयले की रेक लाई जाती है। इसके अलावा लाल बालू की रेक के लिए भी यह माल गोदाम जाना जाता है। कोयले और बालू की रेक से विभाग के कई अधिकारी ‘लाल’ हो गए। अब भी माल गोदाम में रेक लगने के बाद वसूली करने वाले कारखास सक्रिय हो जाते हैं।
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कैंट, मंडुवाडीह, सिटी पर फोकस, काशी अंधेरे में
रेलवे प्रशासन का भी पूरा फोकस कैंट, मंडुवाडीह और सिटी स्टेशन पर है। ऐसे में काशी रेलवे स्टेशन पर अवैध कारोबार करने और करवाने वाले अपना धंधा बिना रोकटोक के कर रहे हैं। ऊपरी कमाई के फेर में अफसर इस रेलवे स्टेशन की उपयोगिता बताने और इसके विकास से बचते हैं।