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गंगा के घाटों में है नामकरण दोष
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वाराणसी। काशी के घाटों की संख्या और उसके पौराणिक नाम में गड़बड़ी को लेकर देव दीपावली महासमिति के अध्यक्ष आचार्य बागीश दत्त ने राज्यमंत्री नीलकंठ तिवारी को ज्ञापन सौंपा और इसे ठीक कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि काशी के घाटों की पौराणिकता और उनकी महत्ता को देखते हुए यह कार्य जल्द पूरा कराने की जरूरत है।
उन्होंने बताया कि कोई कहता है काशी में 80 हैं तो कोई 84 बताता है। मगर यह दोनों ही संख्या गलत हैं। वर्तमान में घाटों की संख्या इन दोनों से कम है। कुछ घाटों का नामकरण दो-दो बार किया गया है जो सही नहीं है। उन्होंने बताया कि कुछ घाटों के पौराणिक नाम मिटा दिए गए या वे घाट ही लुप्त हो गए हैं। हैरान करने वाले ये आंकड़े वरुणा से असि के मध्य गंगा घाटों पर शोध के बाद सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि काशी के गंगा घाट सारे संसार में अपनी सुंदरता और पौराणिक धार्मिक महत्व, मान्यताओं के कारण ही विश्वविख्यात हैं, इसलिए इन गड़बड़ियों को अविलंब ठीक कराया जाए। राज्यमंत्री ने अधिकारियों से सर्वे कराने का आश्वासन दिया है।
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उन्होंने बताया कि कोई कहता है काशी में 80 हैं तो कोई 84 बताता है। मगर यह दोनों ही संख्या गलत हैं। वर्तमान में घाटों की संख्या इन दोनों से कम है। कुछ घाटों का नामकरण दो-दो बार किया गया है जो सही नहीं है। उन्होंने बताया कि कुछ घाटों के पौराणिक नाम मिटा दिए गए या वे घाट ही लुप्त हो गए हैं। हैरान करने वाले ये आंकड़े वरुणा से असि के मध्य गंगा घाटों पर शोध के बाद सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि काशी के गंगा घाट सारे संसार में अपनी सुंदरता और पौराणिक धार्मिक महत्व, मान्यताओं के कारण ही विश्वविख्यात हैं, इसलिए इन गड़बड़ियों को अविलंब ठीक कराया जाए। राज्यमंत्री ने अधिकारियों से सर्वे कराने का आश्वासन दिया है।
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