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अंतरात्मा के अनुसार करें कार्य0
Updated Sat, 17 Mar 2018 02:31 AM IST
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वाराणसी। मिशीगन स्टेट यूनिवर्सिटी के इतिहासकार प्रो. राजमोहन गांधी ने कहा कि चंपारण से जब महात्मा गांधी को बाहर जाने के लिए बाध्य किया गया तो गांधी ने कहा, ‘मेरी अंतरात्मा इसके लिए तैयार नहीं है, मैं नहीं जाने वाला।’ इसका व्यापक प्रभाव देशवासियों पर पड़ा। उन्होंने कहा कि अपनी अंतरात्मा के अनुसार कार्य करना जरूरी है।
वसंता महिला महाविद्यालय राजघाट के इतिहास विभाग की ओर से ‘गांधी चंपारण एवं परे’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी में उन्होंने ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि वर्तमान समस्याओं का हल ढूंढकर उनका निराकरण करने में है। महाविद्यालय के संयुक्त प्रबंधक एसएन दुबे ने कहा कि गांधी जी ने चंपारण के लोगाें को हिम्मत दी। गांधी का दर्शन हमें रास्ता दिखाता है। अध्यक्षता जैन विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. रामजी सिंह ने की। स्वागत प्राचार्य डॉ. अलका सिंह ने किया। संयोजन डॉ. दीप्ति पांडेय ने विषय वस्तु से परिचित कराया। संगोष्ठी के तहत चित्र प्रदर्शनी भी लगाई गई जिसमें बापू के चंपारण आंदोलनों को दर्शाया गया था। संचालन डॉ. श्रेया पाठक व धन्यवाद ज्ञापन डॉ. संजीव कुमार ने किया।
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वसंता महिला महाविद्यालय राजघाट के इतिहास विभाग की ओर से ‘गांधी चंपारण एवं परे’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी में उन्होंने ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि वर्तमान समस्याओं का हल ढूंढकर उनका निराकरण करने में है। महाविद्यालय के संयुक्त प्रबंधक एसएन दुबे ने कहा कि गांधी जी ने चंपारण के लोगाें को हिम्मत दी। गांधी का दर्शन हमें रास्ता दिखाता है। अध्यक्षता जैन विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. रामजी सिंह ने की। स्वागत प्राचार्य डॉ. अलका सिंह ने किया। संयोजन डॉ. दीप्ति पांडेय ने विषय वस्तु से परिचित कराया। संगोष्ठी के तहत चित्र प्रदर्शनी भी लगाई गई जिसमें बापू के चंपारण आंदोलनों को दर्शाया गया था। संचालन डॉ. श्रेया पाठक व धन्यवाद ज्ञापन डॉ. संजीव कुमार ने किया।
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