{"_id":"5a3d6e7e4f1c1bd1408be7a5","slug":"21513975422-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सड़कों की धूल और धुएं से कमजोर हो रहे फेफड़े","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सड़कों की धूल और धुएं से कमजोर हो रहे फेफड़े
Updated Sat, 23 Dec 2017 02:17 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। सड़कों पर हर साल बढ़ रहे वाहन और उनसे निकलने वाला जहरीला धुआं और जगह-जगह पड़ी धूल खतरनाक हो रही है। सरकारी आदेशों का क्रियान्वयन न होने का ही नतीजा है कि फेफड़ों की बीमारियों का शिकार होने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। गौरतलब है कि प्रदेश के पांच सर्वाधिक प्रदूषण वाले शहरों में वाराणसी भी शामिल है।
बीएचयू के सर सुंदर लाल अस्पताल, मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा और जिला अस्पताल समेत निजी अस्पतालों में रोजाना आने वाले मरीजों की संख्या से इसका अंदाज लगाया जा सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक धूल, धुआं शरीर के अंदर जाकर फेफड़ों को कमजोर कर रहा है। उनकी सलाह है कि लोग मॉस्क लगाकर घर से निकलें और हो सके तो खुदाई वाले रास्तों से न आएं-जाएं।
विभागों में तालमेल के अभाव में शहर में सड़कों की खुदाई का काम चलता ही रहता है। कैंट रेलवे स्टेशन पर हर दिन सैकड़ों गाड़ियां खड़ी रहती हैं और यहीं पर फ्लाईओवर का निर्माण चलने से वहां गडढ़े खोद कर छोड़े गए हैं। इससे उड़ने वाली धूल लोगों के शरीर में जा रही है। कमच्छा, भेलूपुर, सिगरा, महमूरगंज और लंका में आईपीडीएस का काम चलने के कारण सड़क किनारे गड्ढ़े खोदे गए हैं। इससे धूल की मात्रा अधिक है। वहीं मैदागिन, रथयात्रा, गोदौलियां, बांसफाटक, चौक और सोनारपुरा में हर दिन लगने वाले जाम के दौरान गाड़ियों का धुएं से यहां खड़े होना भी मुश्किल हो जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बीएचयू के सर सुंदर लाल अस्पताल, मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा और जिला अस्पताल समेत निजी अस्पतालों में रोजाना आने वाले मरीजों की संख्या से इसका अंदाज लगाया जा सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक धूल, धुआं शरीर के अंदर जाकर फेफड़ों को कमजोर कर रहा है। उनकी सलाह है कि लोग मॉस्क लगाकर घर से निकलें और हो सके तो खुदाई वाले रास्तों से न आएं-जाएं।
विज्ञापन
विभागों में तालमेल के अभाव में शहर में सड़कों की खुदाई का काम चलता ही रहता है। कैंट रेलवे स्टेशन पर हर दिन सैकड़ों गाड़ियां खड़ी रहती हैं और यहीं पर फ्लाईओवर का निर्माण चलने से वहां गडढ़े खोद कर छोड़े गए हैं। इससे उड़ने वाली धूल लोगों के शरीर में जा रही है। कमच्छा, भेलूपुर, सिगरा, महमूरगंज और लंका में आईपीडीएस का काम चलने के कारण सड़क किनारे गड्ढ़े खोदे गए हैं। इससे धूल की मात्रा अधिक है। वहीं मैदागिन, रथयात्रा, गोदौलियां, बांसफाटक, चौक और सोनारपुरा में हर दिन लगने वाले जाम के दौरान गाड़ियों का धुएं से यहां खड़े होना भी मुश्किल हो जाता है।
विज्ञापन