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आंखों से नहीं हटता वो नूरानी मंजर
Updated Fri, 08 Sep 2017 02:07 AM IST
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वाराणसी। हाजियों की वतन वापसी का सिलसिला शुरू हो गया है। गुरुवार को पहले दिन 310 हाजी काशी पहुंचे। पाक सरजमीं से होकर लौटे हाजियों की कैफियत ही जुदा है। बारगाहे इलाही का वो मंजर जैसे वो अपनी जुबां से बयान भी कर पा रहे। नाते रिश्तेदारों को मक्का, मदीना, मैदाने अराफात, मस्जिद नबवी के नूरानी मंजर का जिक्र करते वो नहीं थक रहे। यही नहीं सऊदी हुकूमत ने जो व्यवस्थाएं की थीं, वो भी वाकई काबिले तारीफ रही। दुनिया भर से एक जगह इकट्ठा हुए लाखों जाइरीन की मदद को कदम कदम पर लोग मौजूद थे।
बड़ी बाजार के मोहम्मद मोबीन अपनी बीवी मेहर जहां और बेटी तहसीन आलम के साथ अपना हज पूरा किया। उनका कहना है कि पाक परवरदिगार की उस सरजमीं की बात ही कुछ और है। एक साथ लोगों का इबादत में लगे रहना वाकई दिल को सुकून देने वाला था। बेटी तहसीन का कहना है कि वहां हमें किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं हुई। पिछले दौरान के हादसों से वहां की हुकूमत ने शायद इस बार और बेहतर व्यवस्थाएं कीं। मदनपुरा के दाऊद अहमद बताते हैं कि काबे का तवाफ कर दिल को जो सुकून मिला, उसे बयां नहीं किया जा सकता। ऐसी आलीशान मस्जिदें, इबादतगाह, उनका मंजन को आंखों से ही नहीं हटता।
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बड़ी बाजार के मोहम्मद मोबीन अपनी बीवी मेहर जहां और बेटी तहसीन आलम के साथ अपना हज पूरा किया। उनका कहना है कि पाक परवरदिगार की उस सरजमीं की बात ही कुछ और है। एक साथ लोगों का इबादत में लगे रहना वाकई दिल को सुकून देने वाला था। बेटी तहसीन का कहना है कि वहां हमें किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं हुई। पिछले दौरान के हादसों से वहां की हुकूमत ने शायद इस बार और बेहतर व्यवस्थाएं कीं। मदनपुरा के दाऊद अहमद बताते हैं कि काबे का तवाफ कर दिल को जो सुकून मिला, उसे बयां नहीं किया जा सकता। ऐसी आलीशान मस्जिदें, इबादतगाह, उनका मंजन को आंखों से ही नहीं हटता।
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