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एमआरएफ से सुधरेगी शहर की सफाई व्यवस्था
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वाराणसी। बनारस में कचरा प्रबंधन से सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है। खासकर सूखे और गीले कूड़े को अलग करने से उनका प्रबंधन बेहतर ढंग से हो सकेगा। गीले कचरे से कंपोस्ट बनाकर घर के बागीचे में इसका उपयोग किया जा सकता है। स्वच्छ भारत मिशन विजन के तहत बनारस की सफाई व्यवस्था को बेहतर करने के लिए मैटेरियल रिकवरी फैसल्टी (एमआरएफ) केंद्र खोले जाएंगे। यह जानकारी शनिवार को कमिश्नरी सभागार में आयोजित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की कार्यशाला में दी गई।
टाटा ट्रस्ट के विशेषज्ञ प्रमोद डाबरा ने कहा कि काकरोच, मच्छरों को मारने के लिये इस्तेमाल होने वाले केमिकल, बल्ब व ट्यूबलाइट में उपयोग होने वाला पारा घरों से निकले बायोमेडिकल वेस्ट अन्य कचरों से मिलकर भारी मात्रा में डंपिंग ग्राउंड पहुंच रहा है। इनसे निकलने वाले खतरनाक केमिकल जलाशयों, खेतों में जाकर प्रदूषण फैला रहे हैं। यह धीमा जहर हमारे जीवन को खत्म रहा है। घरों से निकलने वाले कचरे से भी कैंसर और बांझपन जैसी बीमारियां हो रही हैं। इससे बचाव के लिये हर परिवार को सजग रहना होगा और कचरे को उसके शुरू में ही अलग करने की आदत डालनी होगी।
जीआईजेड के तकनीकी सलाहकार जय कुमार गौरव ने तकनीकी उपकरणों के माध्यम से अपशिष्ट प्रबंधन की जानकारी दी। उन्होंने गुरुग्राम की तर्ज पर बनारस में कूड़े का विकेंद्रीकरण, अलग करो प्रोजेक्ट और मैनेजमेंट की सलाह दी। नगर आयुक्त आशुतोष कुमार द्विवेदी ने कहा कि केवल थोड़ा सा समय निकाल कर यदि हम सभी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का काम करें तो कूड़ा निस्तारण जैसी शहर की एक बड़ी समस्या का समाधान किया जा सकता है। ठोस कचरा प्रबंधन अधिनियम 2016 के तहत नियमों का उल्लंघन करने पर दंडात्मक कार्रवाई और 10 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। इस अवसर पर अपर नगर आयुक्त अजय कुमार सिंह, गुरु रतन, डॉ. मीनाक्षी, अल्पना राय चौधरी आदि उपस्थित थे।
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टाटा ट्रस्ट के विशेषज्ञ प्रमोद डाबरा ने कहा कि काकरोच, मच्छरों को मारने के लिये इस्तेमाल होने वाले केमिकल, बल्ब व ट्यूबलाइट में उपयोग होने वाला पारा घरों से निकले बायोमेडिकल वेस्ट अन्य कचरों से मिलकर भारी मात्रा में डंपिंग ग्राउंड पहुंच रहा है। इनसे निकलने वाले खतरनाक केमिकल जलाशयों, खेतों में जाकर प्रदूषण फैला रहे हैं। यह धीमा जहर हमारे जीवन को खत्म रहा है। घरों से निकलने वाले कचरे से भी कैंसर और बांझपन जैसी बीमारियां हो रही हैं। इससे बचाव के लिये हर परिवार को सजग रहना होगा और कचरे को उसके शुरू में ही अलग करने की आदत डालनी होगी।
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जीआईजेड के तकनीकी सलाहकार जय कुमार गौरव ने तकनीकी उपकरणों के माध्यम से अपशिष्ट प्रबंधन की जानकारी दी। उन्होंने गुरुग्राम की तर्ज पर बनारस में कूड़े का विकेंद्रीकरण, अलग करो प्रोजेक्ट और मैनेजमेंट की सलाह दी। नगर आयुक्त आशुतोष कुमार द्विवेदी ने कहा कि केवल थोड़ा सा समय निकाल कर यदि हम सभी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का काम करें तो कूड़ा निस्तारण जैसी शहर की एक बड़ी समस्या का समाधान किया जा सकता है। ठोस कचरा प्रबंधन अधिनियम 2016 के तहत नियमों का उल्लंघन करने पर दंडात्मक कार्रवाई और 10 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। इस अवसर पर अपर नगर आयुक्त अजय कुमार सिंह, गुरु रतन, डॉ. मीनाक्षी, अल्पना राय चौधरी आदि उपस्थित थे।
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