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आबकारी विभाग की निष्क्रियता से सक्रिय हैं अवैध शराब कारोबारी
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वाराणसी। सहारनपुर सहित उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई जिलों में जहरीली शराब के चलते हुई मौतों के बाद भले ही प्रदेश भर में अवैध शराब से जुडे़ लोगों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है मगर, वाराणसी में अब तक आबकारी विभाग अलर्ट नहीं हो पाया है। आबकारी विभाग की निष्क्रियता के चलते अवैध शराब कारोबारी सक्रिय हैं। यहां आए दिन अवैध शराब की खेप पुलिस पकड़ती है, मगर आबकारी विभाग जिम्मेदारों पर कार्यवाही नहीं कर पाता। आठ साल पहले वाराणसी में भी जहरीली शराब के चलते 28 लोगों की मौत हुई थी।
बिहार में शराब बंदी के बाद से ही वाराणसी शराब तस्करी का भी केंद्र बना है। यही कारण है कि पिछले दिनों में पकड़ी गई शराब की खेप में हरियाणा और अन्य राज्यों की शराब थी। यह खेप पूर्वांचल के साथ ही बिहार भेजी जाती है। इसी की आड़ में अवैध शराब का धंधा भी यहां तेजी से फल फूल रहा है। इसका प्रमाण आए दिन पुलिस की कार्यवाही में होता है। रोहनिया, रामनगर सहित हाईवे से जुड़े थानों पर अवैध शराब पकड़ी जाती है। उधर, आबकारी विभाग की कार्रवाई सीमित और कागजी रहती है। यहां बता दें कि 17 फरवरी 2010 को सोयेपुर में जहरीली शराब के चलते 28 लोगों की मौत हो गई थी। उधर, जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह का कहना है कि आबकारी विभाग के कामों की समीक्षा की जाती है। 15 दिन तक पुलिस के साथ संयुक्त अभियान का निर्देश भी दिया गया है।
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बिहार में शराब बंदी के बाद से ही वाराणसी शराब तस्करी का भी केंद्र बना है। यही कारण है कि पिछले दिनों में पकड़ी गई शराब की खेप में हरियाणा और अन्य राज्यों की शराब थी। यह खेप पूर्वांचल के साथ ही बिहार भेजी जाती है। इसी की आड़ में अवैध शराब का धंधा भी यहां तेजी से फल फूल रहा है। इसका प्रमाण आए दिन पुलिस की कार्यवाही में होता है। रोहनिया, रामनगर सहित हाईवे से जुड़े थानों पर अवैध शराब पकड़ी जाती है। उधर, आबकारी विभाग की कार्रवाई सीमित और कागजी रहती है। यहां बता दें कि 17 फरवरी 2010 को सोयेपुर में जहरीली शराब के चलते 28 लोगों की मौत हो गई थी। उधर, जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह का कहना है कि आबकारी विभाग के कामों की समीक्षा की जाती है। 15 दिन तक पुलिस के साथ संयुक्त अभियान का निर्देश भी दिया गया है।
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