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डेढ़ माह बाद आज खुलेंगे स्कूल
Updated Mon, 02 Jul 2018 12:32 AM IST
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ज्ञानपुर। ग्रीष्मकालीन अवकाश खत्म होने के बाद सोमवार को जिले के सभी परिषदीय, कान्वेंट विद्यालय खुल जाएंगे। करीब डेढ़ माह बाद सड़कों पर बच्चों की चहल-पहल दिखाई देने लगेगी। स्कूल जाने को लेकर बच्चों में खासा उत्साह देखा गया, हालांकि परिषदीय स्कूलों में किताब न आने से बच्चों को खाली हाथ ही स्कूल जाना पड़ेगा।
अप्रैल में नए शिक्षा सत्र के बाद 20 मई से स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया गया। 30 जून तक अवकाश रहने के बाद एक जुलाई को प्रशासन के निर्देश पर विद्यालय नहीं खुले। दो जुलाई यानि सोमवार को सुबह सात बजे से ही विद्यालय खुल जाएंगे। पहली कक्षा से लेकर आठवीं तक की कक्षाओं में पठन-पाठन का दौर शुरू होगा तो हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और स्नातक प्रवेश का दौर कुछ दिनों तक चलेगा। करीब डेढ़ माह तक बच्चों ने छुट्टी का जमकर आनंद लिया। नाना, मामा, फुफा के यहां जाने से लेकर बच्चों ने जमकर पिकनिक मनाई। इस दौरान शादी विवाह का भी आनंद लिया। अब एक बार फिर उन्हें पढ़ाई की ओर जाना पड़ेेगा। शिक्षा के प्रति समर्पित बच्चे जहां स्कूल जाने को लेकर उत्साहित हैं वहीं जिन बच्चों का मन पढ़ने में नहीं लगता वे कल न जाने का कोई न कोई बहाना ढूढ़ेंगे। विद्यालय खुलने को लेकर कई प्रबंधको और प्रधानाचार्यों की ओर से स्कूलों में साफ-सफाई कराई गई। वहीं दूसरी ओर शासन की ओर से सभी नि:शुल्क किताबें न आने से परिषदीय स्कूलों में बच्चों को खाली हाथ ही पढ़ना होगा।
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अप्रैल में नए शिक्षा सत्र के बाद 20 मई से स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया गया। 30 जून तक अवकाश रहने के बाद एक जुलाई को प्रशासन के निर्देश पर विद्यालय नहीं खुले। दो जुलाई यानि सोमवार को सुबह सात बजे से ही विद्यालय खुल जाएंगे। पहली कक्षा से लेकर आठवीं तक की कक्षाओं में पठन-पाठन का दौर शुरू होगा तो हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और स्नातक प्रवेश का दौर कुछ दिनों तक चलेगा। करीब डेढ़ माह तक बच्चों ने छुट्टी का जमकर आनंद लिया। नाना, मामा, फुफा के यहां जाने से लेकर बच्चों ने जमकर पिकनिक मनाई। इस दौरान शादी विवाह का भी आनंद लिया। अब एक बार फिर उन्हें पढ़ाई की ओर जाना पड़ेेगा। शिक्षा के प्रति समर्पित बच्चे जहां स्कूल जाने को लेकर उत्साहित हैं वहीं जिन बच्चों का मन पढ़ने में नहीं लगता वे कल न जाने का कोई न कोई बहाना ढूढ़ेंगे। विद्यालय खुलने को लेकर कई प्रबंधको और प्रधानाचार्यों की ओर से स्कूलों में साफ-सफाई कराई गई। वहीं दूसरी ओर शासन की ओर से सभी नि:शुल्क किताबें न आने से परिषदीय स्कूलों में बच्चों को खाली हाथ ही पढ़ना होगा।
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