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फोरलेन बनने पर बढ़ जाएगा काशी का पर्यटन
Updated Tue, 27 Mar 2018 02:15 AM IST
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वाराणसी। वाराणसी-हनुमना राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच सेवन) के फोरलेन होने के बाद काशी से कन्याकुमारी की दूरी लगभग ढाई घंटे कम हो जाएगी। इससे दक्षिण भारत से आने वाले पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ स्थानीय शिल्प के कारोबार में चार चांद लग सकते हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को एनएच-7 को फोरलेन करने के कार्य का शिलान्यास किया।
दक्षिण भारत के विभिन्न हिस्सों से मध्य प्रदेश तक की सड़कें फोरलेन हैं। उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करने पर दो लेन की संकरी और गड्ढायुक्त सड़कों के कारण श्रद्धालुओं की परेशानी बढ़ जाती है। वाराणसी से हनुमना तक 140 कलोमीटर का रास्ता तय करने में पांच घंटे से ज्यादा लगता है।
राष्ट्रीय राजमार्ग सात: वाराणसी, चुनार, मिर्जापुर, लालगंज, हनुमना, मऊगंज, रीवा, अमरपाटन, मैहर, जुकेही, कटनी, सिहोरा, जबलपुर, बर्गी, हुल्की होते हुए नागपुर, अदीलाबाद, हैदराबाद, बंगलुरु, मदुरै, तिरुमंगलम से कन्याकुमारी।
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दक्षिण भारत के विभिन्न हिस्सों से मध्य प्रदेश तक की सड़कें फोरलेन हैं। उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करने पर दो लेन की संकरी और गड्ढायुक्त सड़कों के कारण श्रद्धालुओं की परेशानी बढ़ जाती है। वाराणसी से हनुमना तक 140 कलोमीटर का रास्ता तय करने में पांच घंटे से ज्यादा लगता है।
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राष्ट्रीय राजमार्ग सात: वाराणसी, चुनार, मिर्जापुर, लालगंज, हनुमना, मऊगंज, रीवा, अमरपाटन, मैहर, जुकेही, कटनी, सिहोरा, जबलपुर, बर्गी, हुल्की होते हुए नागपुर, अदीलाबाद, हैदराबाद, बंगलुरु, मदुरै, तिरुमंगलम से कन्याकुमारी।
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