{"_id":"594196214f1c1b967d8b47b8","slug":"201497470497-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चालक 20 घंटे चला रहे रोडवेज बसें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चालक 20 घंटे चला रहे रोडवेज बसें
Updated Thu, 15 Jun 2017 01:31 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जौनपुर। सैकड़ों यात्रियों की जिंदगी रोडवेज चालकों के हाथ में है। इसके बावजूद भी परिवहन विभाग नियमों से चार गुना अधिक समय तक रोडवेज चालकों से बसे चलवा रहे हैं। जिसका नतीजा सिकरारा के बरगुदर पुल पर हुई घटना है।
नियम है कि रोडवेज चालकों से साढे पांच घंटा ही काम लिया जाए। लेकिन गोरखपुर और इलाहाबाद रूट पर 18 से 20 घंटे चालकों से काम लिया जा रहा है। गोरखपुर से इलाहाबाद की दूरी 288 किलोमीटर है। ऐसे में 576 किलोमीटर उन्हें बसे चलानी पड़ती है। एक चालक ने बताया कि सुबह आठ बजे गोरखपुर से वह बस लेकर निकलता है तो वह कभी पांच तो कभी छह बजे शाम को इलाहाबाद पहुंचता है। वहां पहुंचने के दो घंटे बाद फिर बस लेकर उन्हें वापस होना पड़ता है। इस तरह भोर में पंाच बजे वह गोरखपुर पहुंच पाता है। इतना समय जाम और क्रासिंग बंद होने की वजह से लगता है। यह अलग बात है कि हर चार घंटे का ओवर टाइम विभाग उन्हें देता है। लेकिन यह नियम संगत नही है। यात्रियाें की जान जोखिम है। वैसे भी रोडवेज की व्यवस्था से यात्री परेशान हैं। एआरएम केशरी नंदन चौधरी का कहना है कि हर साढे पांच घंटे के बाद चालक को बदलने का नियम जरूर है लेकिन उनसे चार घंटे अतिरिक्त काम लेने पर आधे घंटे का रेस्ट दिया जाता है। और ओवर टाइम करने वाले को दूसरे दिन 24 घंटे का रेस्ट मिलता है।
विज्ञापन
नियम है कि रोडवेज चालकों से साढे पांच घंटा ही काम लिया जाए। लेकिन गोरखपुर और इलाहाबाद रूट पर 18 से 20 घंटे चालकों से काम लिया जा रहा है। गोरखपुर से इलाहाबाद की दूरी 288 किलोमीटर है। ऐसे में 576 किलोमीटर उन्हें बसे चलानी पड़ती है। एक चालक ने बताया कि सुबह आठ बजे गोरखपुर से वह बस लेकर निकलता है तो वह कभी पांच तो कभी छह बजे शाम को इलाहाबाद पहुंचता है। वहां पहुंचने के दो घंटे बाद फिर बस लेकर उन्हें वापस होना पड़ता है। इस तरह भोर में पंाच बजे वह गोरखपुर पहुंच पाता है। इतना समय जाम और क्रासिंग बंद होने की वजह से लगता है। यह अलग बात है कि हर चार घंटे का ओवर टाइम विभाग उन्हें देता है। लेकिन यह नियम संगत नही है। यात्रियाें की जान जोखिम है। वैसे भी रोडवेज की व्यवस्था से यात्री परेशान हैं। एआरएम केशरी नंदन चौधरी का कहना है कि हर साढे पांच घंटे के बाद चालक को बदलने का नियम जरूर है लेकिन उनसे चार घंटे अतिरिक्त काम लेने पर आधे घंटे का रेस्ट दिया जाता है। और ओवर टाइम करने वाले को दूसरे दिन 24 घंटे का रेस्ट मिलता है।
विज्ञापन