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Varanasi News: 20 गो आश्रय बंद, सड़कों पर घूम से रहे संरक्षित पशु
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छुट्टे पशुओं को गो आश्रयों केंद्रों में भेजने का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के फरमान का असर जिले में नहीं दिख रहा है। मंगलवार को शहर के साथ और ग्रामीण इलाकों में छुट्टा पशु घूमते दिखे।
जिले में संरक्षित पशुओं को रखने के लिए 121 अस्थायी और नौ स्थायी गो आश्रय केंद्र बनाए गए हैं। इसमें 12 हजार 555 पशु रह रहे हैं। रोहनिया के कान्हा उपवन में गो आश्रय की क्षमता 450 की है लेकिन 426 पशु हैं। भदवर में 28 की क्षमता 25 रखे गए हैं। चौबेपुर के कादीपुर कला गोशाला में 60 पशुओं की क्षमता है, यहां 45 पशु हैं। सेवापुरी विकासखंड के भीटकुरी गांव स्थित स्थाई पशु आश्रय केंद्र की क्षमता 200 की है जिसमें 180 पशु हैं। बडौरा गांव की गोशाला में क्षमता 60 की है, जबकि 65 पशु हैं। चोलापुर ब्लाक के भदवा गांव में 200 की क्षमता हैं, लेकिन 130 पशु हैं। हडियाडीह में 150 की क्षमता हैं और 110 पशु हैं। चिरईगांव के नवापुरा, जयरामपुर, गौराकला, छितौना, मोकलपुर, गौराहीह, बड़ागांव का एक गो आश्रय समेत 20 गो आश्रय केंद्र बंद किए गए हैं।
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छुट्टा पशुओं को गो आश्रय केंद्र में रखा जा रहा है। चारे की व्यवस्था के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। जिले में 121 अस्थायी और नौ स्थायी गोआश्रय केंद्र हैं। पशुओं की संख्या मानक से कम होने से 20 गो आश्रय केंद्र बंद किए गए हैं। इन पशुओं को दूसरी गोशाला भेजा गया है।
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-डॉ. अशोक तिवारी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी
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जिले में संरक्षित पशुओं को रखने के लिए 121 अस्थायी और नौ स्थायी गो आश्रय केंद्र बनाए गए हैं। इसमें 12 हजार 555 पशु रह रहे हैं। रोहनिया के कान्हा उपवन में गो आश्रय की क्षमता 450 की है लेकिन 426 पशु हैं। भदवर में 28 की क्षमता 25 रखे गए हैं। चौबेपुर के कादीपुर कला गोशाला में 60 पशुओं की क्षमता है, यहां 45 पशु हैं। सेवापुरी विकासखंड के भीटकुरी गांव स्थित स्थाई पशु आश्रय केंद्र की क्षमता 200 की है जिसमें 180 पशु हैं। बडौरा गांव की गोशाला में क्षमता 60 की है, जबकि 65 पशु हैं। चोलापुर ब्लाक के भदवा गांव में 200 की क्षमता हैं, लेकिन 130 पशु हैं। हडियाडीह में 150 की क्षमता हैं और 110 पशु हैं। चिरईगांव के नवापुरा, जयरामपुर, गौराकला, छितौना, मोकलपुर, गौराहीह, बड़ागांव का एक गो आश्रय समेत 20 गो आश्रय केंद्र बंद किए गए हैं।
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छुट्टा पशुओं को गो आश्रय केंद्र में रखा जा रहा है। चारे की व्यवस्था के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। जिले में 121 अस्थायी और नौ स्थायी गोआश्रय केंद्र हैं। पशुओं की संख्या मानक से कम होने से 20 गो आश्रय केंद्र बंद किए गए हैं। इन पशुओं को दूसरी गोशाला भेजा गया है।
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-डॉ. अशोक तिवारी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी