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कहते हैं कि गालिब का हैं अंदाज ए बयां और...
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वाराणसी। हैं और भी दुनिया में सुखनवर बहुत अच्छे, कहते हैं कि गालिब का हैं अंदाज ए बयां और...। कुछ इसी अंदाज के साथ पराड़कर भवन में शहर बनारस में मिर्जा गालिब कार्यक्रम के तहत रविवार को शाम-ए-गजल व संगोष्ठी की शुरूआत हुई। मेयार सनेही, वशिष्ठ अनूप, धर्मेंद्र गुप्त साहिल, अभिनव अरुण, अलकबीर, डॉ. संगीता श्रीवास्तव, डॉ. रचना शर्मा, डॉ. मंजरी पांडेय, शमीम गाजीपुरी, डॉ. सविता सौरव और डॉ. अशोक सिंह ने एक से बढ़कर एक रचनाएं सुनाईं।
राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद और महापंडित राहुल सांकृत्यायन शोध एवं अध्ययन केंद्र के तत्वावधान में पराड़कर भवन में शहर बनारस में गालिब कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की शुरूआत संस्था सचिव डॉ. संगीता श्रीवास्तव ने गालिब की मशहूर गजल ‘रहिए ऐसी जगह चलकर जहां कोई न हो...’से हुई। मुख्य अतिथि गीतकार हरिराम द्विवेदी, प्रो. शाहिना रिजवी तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. मुक्ता, डॉ. याकूब यावर, प्रो. अवधेश प्रधान, खालिद आजमी ने मिर्जा गालिब के चित्र पर माल्यार्पण किया। प्रथम सत्र में मिर्जा गालिब के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर चर्चा हुई। सत्र का संचालन अभिनव अरुण ने किया। दूसरे सत्र शाम-ए-गजल की अध्यक्षता प्रसिद्ध शायर मेयार सनेही ने की। संचालन खालिद आजमी और धन्यवाद ज्ञापन बीएल प्रजापति ने किया।
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राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद और महापंडित राहुल सांकृत्यायन शोध एवं अध्ययन केंद्र के तत्वावधान में पराड़कर भवन में शहर बनारस में गालिब कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की शुरूआत संस्था सचिव डॉ. संगीता श्रीवास्तव ने गालिब की मशहूर गजल ‘रहिए ऐसी जगह चलकर जहां कोई न हो...’से हुई। मुख्य अतिथि गीतकार हरिराम द्विवेदी, प्रो. शाहिना रिजवी तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. मुक्ता, डॉ. याकूब यावर, प्रो. अवधेश प्रधान, खालिद आजमी ने मिर्जा गालिब के चित्र पर माल्यार्पण किया। प्रथम सत्र में मिर्जा गालिब के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर चर्चा हुई। सत्र का संचालन अभिनव अरुण ने किया। दूसरे सत्र शाम-ए-गजल की अध्यक्षता प्रसिद्ध शायर मेयार सनेही ने की। संचालन खालिद आजमी और धन्यवाद ज्ञापन बीएल प्रजापति ने किया।
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