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दलहन की खेती पर विशेष ध्यान दें किसान
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वाराणसी। बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान में रविवार को आयोजित कार्यशाला में किसानों को मूंग की वैज्ञानिक खेती से जुड़ी जानकारी दी गई। बतौर मुख्य वक्ता संस्थान के निदेशक प्रो. रमेश चंद्र ने किसानों को दलहन की खेती पर विशेष ध्यान देने की बात कही। कहा कि दलहन के उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ी है लेकिन निर्यात करने की दिशा में खेती के सारे आयामों को ध्यान में रखते हुए बीज का शोध करना होगा।
मृदा वैज्ञानिक प्रो. एसके सिंह ने कहा कि मिट्टी की जांच से पता चला है कि पूर्वांचल के लगभग सभी जिलों में सल्फर, जिंक और बोरॉन की कमी है, इससे पौधों के ऊपर की पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और दाने कमजोर हो जाते हैं, इसका असर उत्पादन पर पड़ता है। प्रो. एमएन सिंह ने मालवीय मूंग 16 के बारे में बताया कि यह 60 से 65 दिन में पककर तैयार हो जाती है। इस दौरान कार्यक्रम समन्वयक प्रो. पीके सिंह ने बनारस, चंदौली आदि जगहों से आए किसानों को मूंग के बीज के पैकेट बांटे। कार्यक्रम में प्रो. राधेश्याम मीणा, प्रो. वीके मिश्र आदि मौजूद रहे।
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मृदा वैज्ञानिक प्रो. एसके सिंह ने कहा कि मिट्टी की जांच से पता चला है कि पूर्वांचल के लगभग सभी जिलों में सल्फर, जिंक और बोरॉन की कमी है, इससे पौधों के ऊपर की पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और दाने कमजोर हो जाते हैं, इसका असर उत्पादन पर पड़ता है। प्रो. एमएन सिंह ने मालवीय मूंग 16 के बारे में बताया कि यह 60 से 65 दिन में पककर तैयार हो जाती है। इस दौरान कार्यक्रम समन्वयक प्रो. पीके सिंह ने बनारस, चंदौली आदि जगहों से आए किसानों को मूंग के बीज के पैकेट बांटे। कार्यक्रम में प्रो. राधेश्याम मीणा, प्रो. वीके मिश्र आदि मौजूद रहे।
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